राजद के न के बाद डॉन राजन तिवारी करेंगे अब चौकीदारी, भाजपा में शामिल




राजद के न के बाद, बिहार में हत्या, अपहरण के आरोपी और आतंक के पर्याय रहे पूर्व विधायक राजन तिवारी बीजेपी के हुए

पूर्व विधायक बृज बिहारी की हत्या समेत 7 और हत्या, 5 हत्या के प्रयास 3 फिरौती के लिए अपहरण, 1 अपहरण, 1 चोरी के अलावा और बहुत सारे मामले के आरोपी (2005 में दिए गए उनके शपथ पत्र से), और कभी उतर प्रदेश और बिहार में आतंक के पर्याय रहे पूर्व विधायक राजन तिवारी शुक्रवार को भाजपा में शामिल हो गए.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, राजन तिवारी ने पहले राजद में शामिल होने के लिए हाथ पैर मारा लेकिन वहां उन्हें कोई सफलता नहीं मिली तो बिहार भाजपा के इंचार्ज भूपेंद्र यादव और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की हामी के बाद भाजपा में शामिल हो गए. शुक्रवार को हुए एक साधारण से कार्यक्रम में मीडिया की बिना शोर शराबा के उत्तर प्रदेश भाजपा के महासचिव सुनील बंसल और अन्य की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ले ली.

9वीं पास डॉन (जैसा कि 2005 के शपथ-पत्र में है) ने अंग्रेजी के एक समाचार पत्र को बताया कि वह भाजपा के एक निष्ठावान कार्यकर्त्ता की तरह कार्य करेंगे. तिवारी मूलतः उत्तर प्रदेश के उसी गोरखपुर के रहने वाले हैं जहाँ से उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री आदित्यनाथ सांसद हैं. बाद में वहां से आकर वह बिहार के पश्चिमी चंपारण के बगहा में बस गए.

राजन पूर्व विधायक दिवंगत देवेन्द्र दुबे के भाई भूपेंद्र नाथ दुबे को 2000 में स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर हराकर गोविन्दगंज के विधायक बने थे.

राजन ने मीडिया को अपने ऊपर लगे आरोप के बारे बताया कि वह उनसे अब मुक्त हो गए हैं हालांकि, उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में आज भी उनका दहशत है.

राजन के पास ब्राह्मण वोट

तिवारी के भाजपा में शामिल होने के पीछे उनके जाति का वोट भाजपा को लुभा रहा है. तिवारी ब्राह्मण हैं और चंपारण में ब्राह्मण का उनको समर्थन है. पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण से भाजपा चुनाव लडती है जबकि वाल्मीकि नगर जद-यू के पास है. चंपारण के क्षेत्र में ब्राह्मण की संख्या अच्छी खासी है.

इसके अलावा, तिवारी के बड़े भाई राजू तिवारी लोजपा से गोविन्दगंज के वर्तमान विधायक हैं. राजन ने दो बार फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005 में विधान सभा का चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए.

बृज बिहारी और वीरेंद्र शाही की हत्या का आरोप

राजन का नाम चर्चित बृज बिहारी हत्याकांड में आया था. बृज बिहारी तब राजद के मंत्री थे और उनकी हत्या पटना के आई.जी.एम.एस कैंपस में दिन दहाड़े कर दी गयी थी जब वह वहां इलाज करा रहे थे. बृज बिहारी पिछड़ी जाति के थे और कहा जाता है कि इन सवर्ण गैंगस्टर के लिए चुनौती बने हुए थे. बृज बिहारी की पत्नी भाजपा की मौजूदा सांसद हैं.

तिवारी को इस काण्ड में निचली अदालत ने आजीवन कारावास सुनाया था लेकिन पटना उच्च न्यायालय ने 2014 में सबूत के अभाव में बरी कर दिया. इस काण्ड में श्रीप्रकाश शुक्ला, सूरजभान सिंह और विजय कुमार शुक्ला या मुन्ना शुक्ला सह-अभियुक्त थे. सूरजभान सिंह भी लोजपा से विधायक रहे हैं. मुन्ना शुक्ल भी विधायक रहे हैं. श्रीप्रकाश शुक्ला दिवंगत हो चुके हैं.

तिवारी पर उत्तर प्रदेश के लक्ष्मीपुर (महाराजगंज) से पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही की भी हत्या का आरोप था. शाही की हत्या लखनऊ के चंद्रलोक चौक पर की गयी थी जब वह 24 अक्टूबर, 1996 को घर अपने कार से लौट रहे थे.

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