राहुल का वह पत्र जिसकी चर्चा आवश्यक है, ज़रूर पढ़ें




राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा की पुष्टि करते हुए अपने ट्विटर हैंडल से चार पृष्ठ का एक पत्र साझा किया है जिसे आज के भारत को समझने के लिए पढ़ा जाना ज़रूरी है. इसमें उनहोंने नरेन्द्र मोदी और आरएसएस के खिलाफ लड़ाई में अपने अकेलेपन का भी वर्णन किया है.

अंग्रेजी में उनके लिखे संपूर्ण पत्र का हिंदी रूपांतरण

कांग्रेस पार्टी की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात है, जिसके मूल्यों और आदर्शों ने हमारे सुंदर देश के लाइफ ब्लड के रूप में काम किया है. मैं इस देश और अपने संगठन से मिले अपार कृपा और प्यार का ऋणी हूँ.

कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष होने के नाते, मैं 2019 चुनाव में हार का ज़िम्मेदार हूँ. ज़िम्मेदारी हमारी पार्टी के भावी विकास के लिए महत्वपूर्ण है. यही कारण है कि मैंने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है.

पार्टी के पुनर्निर्माण के लिए कठोर निर्णय की आवश्यकता है और बहुत सारे लोगों को 2019 की असफलता के लिए ज़िम्मेदारी बनाया जाएगा. यह बेईमानी होगी अगर हम दूसरों को ज़िम्मेदार बनाएं और अध्यक्ष के रूप में अपनी ज़िम्मेदारी को नज़र अंदाज़ कर दें.

मेरे कई साथी ने सुझाव दिया कि अगले कांग्रेस अध्यक्ष का नाम मैं आगे करूँ. यह महत्वपूर्ण है कि कोई नया चेहरा हमारी पार्टी का नेतृत्व करे लेकिन यह कहना गलत होगा कि उस इंसान का चयन मैं करूँ. हमारी पार्टी का एक बड़ा इतिहास और विरासत है – संघर्ष और मान-मर्यादा का जिसका मैं भरपूर सम्मान करता हूँ. यह भारत की संरचना में बुना हुआ है और मुझे भरोसा है कि पार्टी इस पर निर्णय लेगी कि कौन साहस, प्रेम और निष्ठा के साथ इसका नेतृत्व कर सकता है.

इस्तीफे के तुरंत बाद, मैं ने कांग्रेस वर्किंग कमिटी में अपने दोस्तों को सुझाव दिया कि लोगों के एक समूह को नए अध्यक्ष की तलाश का काम सौंपा जाए. मैंने उन्हें इस काम का अधिकार दे दिया है और इस प्रक्रिया में और अच्छे तरीके से एक बदलाव के लिए अपना समर्थन देने का वादा भी किया है.

मेरी लड़ाई राजनैतिक सत्ता हासिल करने के लिए मामूली लड़ाई कभी नहीं रही. भाजपा से मुझे कोई नफरत या गुस्सा नहीं है लेकिन मेरे शरीर की हर कोशिका जो जिंदा है उनके भारत की कल्पना का स्वाभविक रूप से विरोध करती है. यह विरोध इसलिए है क्योंकि मेरा अस्तित्व उस भारत की कल्पना को लेकर है जिसका उनके भारत की कल्पना से सीधे सीधे विरोध है. यह कोई नई लड़ाई नहीं है; यह लड़ाई हम लोगों की धरती पर हज़ारों साल की लड़ाई है. जहाँ उन्हें असमानता नज़र आता है वहां मैं समानता देखता हूँ. जहाँ उन्हें नफरत दिखाई देता है मुझे प्रेम दिखाई देता है. जिनसे उन्हें डर लगता है मैं उन्हें गले लगाता हूँ.

यही करुणामय विचार मेरे प्यारे करोड़ों देशवासियों के दिलों में भरा पड़ा है. यही वह विचार है जिसकी हमें शिद्दत के साथ हिफ़ाज़त करनी है.

हमारे देश और हमारे अभिलषित संविधान पर हमला जो हमारे देश की संरचना को तबाह करने के लिए किया जा रहा है. किसी भी तरह से, किसी भी रूप में मैं इस लड़ाई से पीछे नहीं हट रहा हूँ. मैं कांग्रेस पार्टी ला वफादार सिपाही हूँ और भारत का समर्पित पुत्र हूँ और मैं अपनी आखरी सांस तक इसकी सेवा करता रहूँगा और इसकी हिफ़ाज़त करता रहूँगा.

हमने एक मज़बूत और गरिमापूर्ण चुनाव लड़ा. हमारा अभियान भारत के सभी लोगों, धर्मों और समुदायों के बीच भाईचारा, सहनशीलता और सम्मान के लिए था. मैंने अकेले अपनी पूरी ताक़त के साथ प्रधान मंत्री, आरएसएस और उन संस्थाओं से लड़ा जिसे उनहोंने अपने कब्जे में कर रखा है. मैं लड़ा क्योंकि मुझे भारत से प्यार है. और मैं उन आदर्शों के लिए लड़ा जिस पर भारत खड़ा है. कभी कभी, मैं बिलकुल अकेला खड़ा था और मुझे इस पर बहुत गर्व है. मैंने अपने कार्यकर्ताओं और पार्टी के सदस्यों – मर्द और औरतों के जोश और समर्पण से बहुत कुछ सीखा है जिन्होंने मुझे प्यार और सभ्यता सिखाई है.

निष्पक्ष और ईमानदार चुनाव के लिए आवश्यक है कि देश की संस्थाएं निष्पक्ष हों; चुनाव पंचों – मुक्त प्रेस, स्वतंत्र न्यायपालिका और पारदर्शी चुनाव आयोग जो अपने काम से काम रखे और निष्पक्ष हो, के बिना निष्पक्ष नहीं हो सकता. चुनाव तब भी निष्पक्ष नहीं हो सकता है जब किसी एक पार्टी के पास पूर्ण एकाधिकार और वित्तीय संसाधन हो.

हमने 2019 चुनाव में किसी राजनैतिक पार्टी से लड़ाई नहीं लड़ी. बल्कि हम भारतीय सत्ता के हर मशीनरी से लड़े, हर उस संस्था से लड़े जो विपक्षी पार्टी के खिलाफ लामबंद थी. यह अब स्पष्ट है कि जो निष्पक्षता कभी इन संस्थाओं में होती थी वह अब नहीं रहा.

हमारे देश के संगठनात्मक संरचना पर क़ब्ज़ा का जो आरएसएस का स्पष्ट उद्देश्य था वह अब पूरा हो चुका है. हमारी लोकतंत्र पूरी तरह से कमज़ोर हो चुकी है. अब जो असल खतरा है वह यह कि भारत के भविष्य को तय करने वाला चुनाव अब मात्र रिवाज रह जाएगा.

सत्ता पर यह क़ब्ज़ा भारत में अप्रत्याशित स्तर की हिंसा और दर्द को जन्म देगा. किसान, बेरोजगार नौजवान, महिलाएं, आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले हैं. हमारी अर्थव्यवथा और राष्ट्र की प्रतिष्ठा मिटटी में मिल जाएगी. प्रधानमंत्री की जीत से उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप समाप्त नहीं होते; धन चाहे जितना लगा दें और प्रचार चाहे जितना कर लें वह सच्चाई को छिपा नहीं सकती.

संस्थाओं को बहाल करने और उन्हें फिर से जिंदा करने के लिए पूरे देश को एक होना होगा. इस पुनर्जीवन का साधन कांग्रेस पार्टी ही बनेगी.

इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा करने के लिए, कांग्रेस पार्टी को खुद को पूरी तरह से बदलना होगा. आज भाजपा भारत के लोगों की आवाज़ को पूरी योजना के साथ दबा रही है. कांग्रेस पार्टी का यह दायित्व है कि वह उन आवाजों की रक्षा करे. भारत न कभी एक आवाज़ था और न होगा. यह हमेशा से आवाजों का मेल है. यही भारत माता का सही सार है.

देश विदेश के हजारों भारतवासियों का धन्यवाद जिन्होंने मुझे समर्थन के पत्र और सन्देश भेजे. मैं निस्संदेह अपनी पूरी क्षमता से कांग्रेस पार्टी के आदर्शों के लिए लड़ता रहूँगा. मेरी पार्टी को किसी भी सेवा, सुझाव या मशविरे की ज़रूरत होगी तो मैं पार्टी के लिए उपलब्ध रहूँगा. उन लोगों को जो कांग्रेस की आइडियोलॉजी को सपोर्ट करते हैं खासकर हमारे समर्पित और प्यारे कार्यकर्त्ता को मैं कहना चाहता हूँ कि मुझे हमारे भविष्य में पूरा भरोसा है और आपके लिए बेपनाह प्रेम है. भारत में यह आदत है कि लोग सत्ता से चिपके रहते हैं और कोई सत्ता कुर्बान नहीं करता. लेकिन हम अपने विरोधियों को सत्ता पाने की ललक को कुर्बान किए बगैर और भयंकर वैचारिक लड़ाई लड़े बिना नहीं हरा पाएंगे. मैं कांग्रेसी पैदा हुआ हूँ, यह पार्टी मेरे साथ हमेशा रही है मेरे खून में रही है और इसी तरह यह हमेशा रहेगी.

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