कैमरे के सामने की नौटंकी से गदगद होने से पहले इसरो के इंजिनियरों की यह चिट्ठी भी पढ़ लें




चन्द्रयान – 2 की सफ़लता में बाधा आने के बाद इसरो चेयरमैन डॉ के. सिवन रो पड़े तब प्रधानमंत्री ने उन्हें गले लगाते हुए सांत्वना दी. इस तस्वीर को पूरे देश ने सर आखों पर बिठाया और इसरो के वैज्ञानिकों को पूरे देश का समर्थन मिला. नेहरु द्वारा स्थापित इस संस्थान की कई बड़ी उपलब्धियां रही और इसके वैज्ञानिकों ने अन्तरिक्ष में भारत का झंडा गाड़ा. आज विश्व में इसरो और भारत की अन्तरिक्ष विज्ञान में उपलब्धियों को इज्ज़त से देखा जाता है. लेकिन कमरे के सामने जो हुआ वह तो सबने जाना जबकि उन्हीं वैज्ञानिकों की तनख्वाह में कटौती करके नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने वैज्ञानिकों और इंजिनियरों का मनोबल कम किया उसे बहुत कम लोगों ही पता चला. इसको लेकर इसरो के वैज्ञानिकों के संगठन स्पेस इंजीनियर्स एसोसिएशन (SEA) ने इसरो चेयरमैन डॉ. के. सिवन को पत्र लिखकर मांग की है कि वे इसरो वैज्ञानिकों की तनख्वाह में कटौती करने वाले केंद्र सरकार के आदेश को रद्द करने में मदद करें. तनख्वाह में कटौती को लेकर हम वैज्ञानिक, केंद्र सरकार के फैसले से बेहद हैरत में हैं और दुखी हैं.

ज्ञात रहे कि भारत सरकार ने Chandrayaan-2 की लॉन्चिंग से ठीक पहले ISRO वैज्ञानिकों की तनख्वाह में कटौती कर दी थी. केंद्र सरकार ने 12 जून 2019 को जारी एक आदेश में कहा है कि इसरो वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को साल 1996 से दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि के रूप में मिल रही, प्रोत्साहन अनुदान राशि को बंद किया जा रहा है.

एक और प्रधानमंत्री चन्द्रयान-2 के अपने ऑर्बिटर से संपर्क टूटने पर वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते नजर आते हैं तो दूसरी और उनकी सरकार तनख्वाह में कटौती करती है.

इसरो के वैज्ञानिकों के संगठन स्पेस इंजीनियर्स एसोसिएशन (SEA) ने इसरो के चेयरमैन डॉ. के. सिवन को पत्र लिखकर मांग की है कि वे इसरो वैज्ञानिकों की तनख्वाह में कटौती करने वाले केंद्र सरकार के आदेश को रद्द करने में मदद करें. क्योंकि वैज्ञानिकों के पास तनख्वाह के अलावा कमाई का कोई अन्य जरिया नहीं है. SEA के अध्यक्ष ए. मणिरमन ने इसरो चीफ को लिखे पत्र में कहा है कि सरकारी कर्मचारी की तनख्वाह में किसी भी तरह की कटौती तब तक नहीं की जा सकती, जब तक बेहद गंभीर स्थिति न खड़ी हो जाए. तनख्वाह में कटौती होने से वैज्ञानिकों के उत्साह में कमी आएगी. हम वैज्ञानिक केंद्र सरकार के फैसले से बेहद हैरत में हैं और दुखी हैं.

SEA ने इसरो चीफ को लिखे पत्र में बिंदुवार ये मांगे रखी हैं…

स्पेस इंजिनियर्स एसोसिएशन की लिखी डॉ. सिवन को चिट्ठी (1)

1. इसरो वैज्ञानिकों के लिए दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि की अनुमति राष्ट्रपति ने दी थी. ताकि देश में मौजूद बेहतरीन टैलेंट्स को इसरो वैज्ञानिक बनने का प्रोत्साहन मिले. साथ ही इसरो वैज्ञानिक भी प्रेरित हो सके. ये अतिरिक्त वेतन वृद्धि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 1996 में अंतरिक्ष विभाग ने लागू किया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा था कि इस वेतन वृद्धि को स्पष्ट तौर पर ‘तनख्वाह’ माना जाए.

स्पेस इंजिनियर्स एसोसिएशन की लिखी डॉ. सिवन को चिट्ठी – 2

2. छठे वेतन आयोग में भी इस वेतन वृद्धि को जारी रखने की सिफारिश की गई थी. साथ ही कहा गया था कि इसका लाभ इसरो वैज्ञानिकों को मिलते रहना चाहिए.

3. दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि इसलिए लागू किया गया था कि इसरो में आने वाले युवा वैज्ञानिकों को नियुक्ति के समय ही प्रेरणा मिल सके और वे इसरो में लंबे समय तक काम कर सकें.

4. केंद्र सरकार के आदेश में परफॉर्मेंस रिलेटेड इंसेंटिव स्कीम (PRIS) का जिक्र है. हम यह बताना चाहते हैं कि अतिरिक्त वेतन वृद्धि और PRIS दोनों ही पूरी तरह से अलग-अलग हैं. एक इंसेंटिव है, जबकि दूसरा तनख्वाह है. दोनों एकदूसरे की पूर्ति किसी भी तरह से नहीं करते.

5. सरकारी कर्मचारी की तनख्वाह में किसी भी तरह की कटौती तब तक नहीं की जा सकती, जब तक बेहद गंभीर स्थिति न खड़ी हो जाए.

केंद्र सरकार की तनख्वाह में कटौती के इस आदेश से D, E, F और G श्रेणी के वैज्ञानिकों को यह प्रोत्साहन राशि अब नहीं मिलेगी. इसरो में करीब 16 हजार वैज्ञानिक और इंजीनियर हैं. लेकिन इस सरकारी आदेश से इसरो के करीब 85 से 90 फीसदी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की तनख्वाह में 8 से 10 हजार रुपए का नुकसान होगा. क्योंकि ज्यादातर वैज्ञानिक इन्हीं श्रेणियों में आते हैं. इसे लेकर इसरो वैज्ञानिक नाराज हैं.

(आजतक की ख़बर के आधार पर)

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