हिमाचल चुनाव में कई रिश्तेदार आमने सामने, दामाद भाजपाई, ससुर कांग्रेसी




-विशाल गुलाटी

शिमला, 31 अक्टूबर | इस बार नौ नवम्बर को होने वाले हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कई उम्मीदवार ऐसे हैं जो परिवारिक बंधनों में तो एक-दूसरे से बंधे हैं लेकिन दूसरी ओर चुनावी अखाड़े में एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं। रिश्तेदार या निकट संबंधी होने के बावजूद अलग-अलग राजनीतिक मंच से ये उम्मीदवार कई मुद्दे उठाते हैं, यहां तक की कई बार ये निजी हमले पर उतारू हो जाते हैं।

दो बार मुख्यमंत्री रह चुके भाजपा के प्रेम कुमार धूमल से लगभग दो वर्षो तक राजनीति का ककहरा सीखने वाले कांग्रेस उम्मीदवार राजिंदर राणा उन्हें अब चुनावी अखाड़े में राजनीति के जरिए ‘सबक सिखाने’ के प्रयास में हैं।

डॉक्टर से नेता बने और चुनाव की घोषणा होने के कुछ दिन बाद ही भाजपा में शामिल हुए राजेश कश्यप अपने ससुर और कांग्रेस उम्मीदवार धनी राम शांडिल के खिलाफ चुनावी अखाड़े में हैं। शांडिल मौजूदा सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

उसी तरह कासुमप्टी से कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह अपनी चाची व भाजपा उम्मीदवार विजय ज्योति सेन के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं।

विजय ज्योति सेन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की रिश्तेदार हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि धूमल और राणा के बीच सबसे रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। राणा भाजपा के गढ़ हमीरपुर जिले के सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र से धूमल के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

धूमल इस सीट से पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। राणा ने वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां से स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की थी। उन्होंने 14,116 वोटों के अंतर से यह सीट जीती थी।

बाद में उन्होंने यह सीट छोड़ दी थी और 2014 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर यहां से चुनाव लड़ा था। खाली हुई सुजानपुर सीट पर दोबारा कराए गए चुनाव में भाजपा के नरेंद्र ठाकुर की जीत हुई थी।

‘राजा साब’ के रूप में जाने जाने वाले और कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार वीरभद्र सिंह भाजपा की झोली से सुजानपुर सीट छीनने के लिए पूरी मेहनत कर रहें हैं।

उसी तरह उनके धुर विरोधी धूमल अपना ज्यादा समय और ऊर्जा इस विधानसभा क्षेत्र में लगा रहें हैं ताकि यह सीट भाजपा के पास ही रहे।

कभी धूमल के कैंपेन मैनेजर रह चुके राणा ने आईएएनएस को बताया, “मैं इस सीट पर विधायक के तौर पर अपने 15 महीने के काम को उजागर कर रहा हूं और अपने काम का मुकाबला भाजपा के 36 महीने के काम से कर दोबारा चुनाव जीतने की कोशिश कर रहा हूं।”

वह धूमल और उनके सांसद बेटे अनुराग ठाकुर पर भाजपा के कार्यकाल के दौरान कथित गड़बड़ियों का लगातार आरोप लगाते रहें हैं। वहीं सत्तर वर्ष की उम्र पार कर चुके धूमल भाजपा द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

राजनीति, निकट संबंधियों, यहां तक की खून के रिश्ते को भी बांट सकती है।

सोलन आरक्षित सीट के लिए, भाजपा की तरफ से अनुभवहीन कश्यप अपने ससुर और कांग्रेस उम्मीदवार शांडिल के खिलाफ चुनाव लड़ते नजर आएंगे।

दोनों उम्मीदवार शायद ही कभी एक-दूसरे के खिलाफ व्यक्तिगत हमले करते हैं। दोनों विकास के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं।

कश्यप ने सरकारी नौकरी से स्वच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति की राह चुनी है।

कासुमप्टी सीट के लिए खड़े छह उम्मीदवारों में से तीन का संबंध शाही परिवारों से है। ये उम्मीदवार कांग्रेस की तरफ से अनिरुद्ध सिंह, भाजपा की तरफ से विजय ज्योति सेन और माकपा से कुलदीप तंवर हैं। तंवर किसान सभा के राज्य अध्यक्ष हैं।

तंवर ने आईएएनएस को बताया, “अनिरुद्ध और सेन अभी भी अपने गरिमामयी इतिहास को भुना रहे हैं और शायद ही कभी दबे-कुचले लोगों और दलितों की आवाज उठाते हैं जिनकी संख्या इस विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा है।”

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह शिमला (ग्रामीण) सीट से चुनाव लड़ कर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में वीरभद्र ने यहां से चुनाव जीता था।

उनका मुकाबला भाजपा के प्रमोद शर्मा से है। शर्मा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में प्राध्यापक हैं और कभी उन्हें वीरभद्र सिंह का करीबी माना जाता था।

राज्य में चुनाव के नतीजे गुजरात चुनाव के नतीजों के साथ 18 दिसम्बर को घोषित किए जाएंगे।

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