देश भर के मुस्लिम #EqualCitizens के तहत अपने मुद्दों की करेंगे अपील




2019 के आगामी चुनावी दौर की जहाँ शुरुआत हो चुकी है वही भारत भर में मुस्लिम युवाओं के फ़र्ज़ी एनकाउंटर, लिंचिंग, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की हत्याओं, वोटरलिस्ट से गायब होते नामो के बढ़ते मामलों पर ध्यान देने को लेकर #EqualCitizens के तहत विरोध सभा का संयुक्त ऐलान किया गया है।



13 अक्टूबर को मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरू, वाराणसी, लखनऊ, पुणे, कोलकाता जैसे शहरों में विरोध प्रदर्शन के लिए एक संयुक्त कॉल जारी किया गया है, जहाँ सोशल मीडिया से लेकर तमाम संस्थाओं के ज़रिये देश से अधिक से अधिक लोगों को शामिल होने की तैयार हैं।

इस अभियान के ज़रिये देश के मुसलमानो के मुद्दों को एक प्लेटफ्रॉम पर लेकर आना है। जो मुसलमानों के सामने आने वाले मुद्दों को स्थान देने के लिए #VoteHamaraBaatHamari, सरकार से अपील है।

#EqualCitizen के आयोजक एसोसिएसन ऑफ़ मुस्लिम प्रोफेशनल के संस्थापक आमिर इदरीसी हैं। जिन्होंने एक महीने पहले छात्रों, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज समूहों के बीच बढ़ती अशांति को लेकर बैठक किया था जिसके बाद इस विषय पर विरोध सभा का आवाहन किया गया।


#EqualCitizen के आयोजक आमिर इदरीसी ने बताया कि हम अपना खुद का एजेंडा निर्धारित करना चाहते हैं, जिन लोगों को हम वोट देते हैं उन्हें पता होना चाहिए कि उन्हें हमारे मुद्दों क्या हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 20% मुसलमानों की आबादी हैं और इसको नाकारा नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि ये न केवल सरकार के लिए अपील है बल्कि मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की भी अपील है जिसे हर हाल में आगे आना चाहिए और इन मुद्दों पर बात करनी चाहिए।

आमिर इदरीसी ने कहा कि, हम सरकार से ऐसा कुछ भी नहीं मांग रहे हैं जो सविधान में नहीं है बल्कि जो हमारा संवैधानिक अधिकार है हम वही मांग रहे हैं।


अभियान के बारे में बोलते हुए, कार्यकर्ता और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र फहद अहमद ने कहा, “इस विरोध का मुख्य एजेंडा यह है कि हम संविधान द्वारा हमें दिए गए अधिकारों की मांग को रखना है।”

फहद अहमद ने ये बात साफ़ तौर पर कही है की ये कोई भाजपा विरोधी अभियान नहीं है। ये एक संवैधानिक अधिकार को लेकर अभियान है। ये अभियान है डॉ अम्बेडकर द्वारा दिए गए अधिकारो जो सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता के बारे में बात करते हैं … हमें संवैधानिक आचारों से राजनीतिक स्थिति से वंचित नहीं किया जा सकता।”

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