‘गौरैया’ संरक्षण का संदेश देती संजय कुमार की फोटो प्रदर्शनी




बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्ण नन्दन प्रसाद वर्मा, कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स, आर्ट एंड साइंस के पत्रकारिता विभाग के कोऑर्डिनेटर डॉ तारिक़ फ़ातमी, प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो के सहायक निदेशक संजय कुमार प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर

-द मॉर्निंग क्रॉनिकल हिंदी डेस्क

पटना (बिहार), दिसम्बर 22, 2017 ।  कॉलेज ऑफ कामर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना के ‘स्ट्राइड’ कार्यक्रम के अवसर पर प्रेस इन्फोर्मेशन ब्यूरो, पटना के सहायक निदेशक और लेखक-पत्रकार संजय कुमार द्वारा खींची गौरैया की तीन दिवसीय फोटो प्रदर्शनी “अभी मैं जिंदा हूँ…..गौरैया” छात्रों और दर्शकों के बीच आकर्षण केंद्र बना रहा। सेल्फी और फोटो खीचने- खिचवाने का सिलसिला खूब चला।



विलुप्त होती गौरैया को संरक्षित करने के उद्देश्य से  कालेज ऑफ कामर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग और कम्युनिटी राइट्स एण्ड डेवलपमेंट फाउंडेशन (सी आर डी एफ), के सहयोग से राजकीय पक्षी “गौरैया” पर फोटो प्रर्दशनी लगाई गयी।

बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने 20 दिसंबर को इसका उद्धाटन किया था। इस अवसर पर उनहोंने कहा था कि “राजकीय पक्षी ‘गौरैया’ का  बसेरा कभी इंसानों के घर-आंगन में  हुआ  करता था। लेकिन अब यह बहुत कम दिखती है, जरूरत है  इसके संरक्षण की।”  शिक्षा मंत्री ने कहा कि गौरैया की संख्या में कमी आई है जो चिंता का विषय है। ऐसे में संजय कुमार की फोटो प्रर्दशनी ‘गौरैया’ संरक्षण का संदेश देती है।

विलुप्त होती ‘गौरैया’ की  तस्वीरों की तीन  दिवसीय  फोटो प्रदर्शनी ‘‘अभी मैं जिंदा हूँ…..गौरैया’’ के अवसर पर कालेज के प्राचार्य प्रो. डा. जैनेन्द्र कुमार ने कहा कि छोटे आकार वाली खूबसूरत  गौरैया  पक्षी का ज्रिक आते ही बचपन की याद आ जाती है। हमें इसके बचाव के उपाय करने होंगे। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के कोऑर्डिनेटर प्रो. डॉ तारिक फातमी ने कहा कि संजय कुमार की यह प्रदर्शनी गौरैया संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने में अहम विशेष भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि काॅलेज और विभाग की कोशिश है कि पयार्वरण को बचाने की हर प्रयास हो इसलिए यह पहल की गई है।

इस अवसर पर लेखक -पत्रकार  संजय कुमार ने कहा कि इस फोटो प्रदर्शनी का  मकसद लोगों को गौरैया  के प्रति संवेदनशील  बनाना  है ताकि विलुप्त होती इस नन्हीं सी जान का संरक्षण  हो सके। कुमार ने कहा कि घर-आंगन में  चहकने-फूदकने वाली छोटी सी  प्यारी चिड़िया गौरैया की आबादी में 60 से 80 फीसदी तक की कमी आई है।

तीन  दिवसीय  फोटो प्रदर्शनी “अभी मैं जिंदा हूँ…..गौरैया” को संरक्षित करने की  बात करते हुए तीनों दिन छात्र-छात्राओं और लोगों को देखी गयी। अंशुमन कुमार, नेहा, शिष्टी ने कहा कि अब कम गौरैया दिखती है फोटो देख अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी गौरैया संरक्षण  के प्रति जागरूकता लाने में अहम भूमिका निभाएगी। वहीं मनीष, निकिता मिश्रा और इमरान ने कहा कि जिस तरह से पेड़ कट रहे हैं उससे इनके आशियाने उजड़ रहे है। प्रदर्शनी  के अंतिम दिन संजय कुमार ने कहा कि लगातार तीन दिन लोग चित्रों के आकर्षण से खींचे आये। सेल्फी और फोटो खींचवाते रहे। उन्होंने कहा कि सिर्फ इंटरनेट पर चित्रों को देख देख कर आह भरने से नहीं होगा बल्कि इस दिशा में कदम बढ़ाना होगा और घरों से रूठ कर दूर गयी गौरैया को वापस बुलाना होगा।

 

गौरैया की विभिन्न अदाओं को 30 फोटो में समेटे प्रदर्शनी को दिनेष कुमार द्वारा लिखे कैप्शन ने और आकर्षक बना दिया। इस दौरान सबसे अलग फोटो पहचानने की प्रतियोगिता मौके पर फोटोग्राफर संजय कुमार ने रखी। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के छात्र उज्जवल शाह ने 90 डिग्री पर सर घुमाये गौरैया को पहचान कर पुस्तक पुरस्कार में जीता। इस अवसर पर कालेज ऑफ कामर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के छात्र-छात्राएं और सी आर डी एफ के साकिब ज़िया, इमरान, डा.लीना सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

टीएमसी समाचार

 

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