सीबीआई चीफ को हटाने में भूमिका निभाने वाले सुप्रीम कोर्ट के जज ने ठुकराया केंद्र का ऑफर




जस्टिस एकेसिकरी (मध्य) अलोक वर्मा (बाएँ) और प्रधान मंत्री मोदी (दाएं) के बीच में (चित्र साभार: ट्विटर)

कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी के ऐसे फैसले लेने की वजह उनका डर है”।

 

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एके सीकरी, जिनके वोट से सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को शीर्ष पद से हटाने का फैसला करने में मदद मिली, ने सरकार से मिले सेवानिवृत्ति के बाद के ऑफर को ठुकरा दिया। उनके करीबी सूत्रों ने मीडिया ने बताया कि उनहोंने 6 मार्च को सेवानिवृत्त होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा दिए गए ऑफर में दिलचस्पी नहीं दिखाई।



समाचार वेबसाइट द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस सीकरी को लंदन स्थित राष्ट्रमंडल सचिवालय के अध्यक्ष/सदस्य (सीएसएटी) के रूप में नामित किया गया था। विपक्ष ने इस पर केन्द्र की पसंद पर सवाल उठाया था।

CSAT राष्ट्रमंडल के अपने 53 सदस्य देशों के बीच विवादों का अंतिम मध्यस्थ (arbitrator) होता है। सदस्यों को चार साल के कार्यकाल पर नियुक्त किया जाता है जिसे केवल एक बार ही रिन्यू किया जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के बाद वरिष्ठता में दूसरे शीर्ष के न्यायाधीश को सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद CSAT में शामिल होने की उम्मीद थी।

सूत्रों ने कहा कि न्यायमूर्ति सीकरी ने केंद्र को लिखा कि वह “हाल के घटनाक्रमों से दुखी है”. ऐसा उनहोंने जाहिर तौर पर सीबीआई प्रमुख के पद से हटने के बाद उनके वोट की आलोचना को लेकर कहा है।

न्यायाधीश के करीबी सूत्रों ने कहा, “सरकार ने पिछले महीने उन्हें असाइनमेंट के लिए संपर्क किया था। तब उन्होंने अपनी सहमति दे दी थी। इस काम के लिए उन्हें साल में दो से तीन सुनवाई में भाग लेना था जिसके लिए उन्हें कोई पारिश्रमिक नहीं मिलना था.”

“मैं अपनी सहमति वापस ले रहा हूं … कृपया इसे आगे न बढाएं,” उनहोंने पत्र में कथित तौर पर ऐसा कहा।

कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी के ऐसे फैसले लेने की वजह उनका डर है।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आलोक वर्मा को बहाल करने के बाद उन पर निर्णय लेने का कार्य करने के लिए एक समिति बनाई थी जिसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने न्यायमूर्ति सीकरी को नामित किया था – जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल थे।

पैनल का फैसला 2:1 था – पीएम मोदी और जस्टिस एके सीकरी के वोट श्री वर्मा के खिलाफ गए। खड़गे ने इसका विरोध किया था. उनका कहना था कि वर्मा के खिलाफ “पर्याप्त सबूत” का अभाव है और उन्हें सीबीआई चीफ के पद से हटाया नहीं जाना चाहिए।

65 वर्षीय न्यायमूर्ति सीकरी ने 2013 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। इससे पहले वह पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे।

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