बुलंदशहर में छेड़छाड़ के कारण हुई सुदीक्षा की मौत दुर्भाग्यपूर्ण, उत्तर प्रदेश सरकार से महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह: सिविल सोसाइटी




उड़ीसा श्रमजीबी मंच, महिला श्रमजीबी मंच, सोनभद्र विकास संगठन और आत्मशक्ति ट्रस्ट ने इस घटना की निंदा की है एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश पुलिस एवं बुलंदशहर के जिलाधिकारी से सुदीक्षा और उनके परिवार को तत्काल न्याय देने की मांग की है.

प्रेस विज्ञप्ति: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2016 के अपराध के आंकडे ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि हमारे देश का चाहे वह शहर हो या गाँव, महिलाओं के लिए वह असुरक्षित होते जा रहे हैं. हाल में हुई सुदीक्षा की मौत के मामले ने हम सब को अन्दर तक हिला कर रख दिया है. सुदीक्षा स्कालरशिप प्राप्त कर अमेरिका में पढ़ रही थीं. कोरोना के कारण वह अपने गाँव उत्तर प्रदेश के दादरी आई हुई थीं. दादरी से जब वह अपने चाचा मनोज भाटी के साथ औरंगाबाद अपने रिश्तेदारों से मिलने जा रही थी तभी कुछ बाइक सवार मनचलों ने उन्हें परेशान करना शुरू किया जिससे उनके चाचा के बाइक का नियंत्रण खो गया और गिरने से उनकी वहीँ मौत हो गयी.

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महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाये गए कई क़ानूनों के बावजूद भी हमारे देश में महिलाएं सुरक्षित नहीं है जो चिंता का विषय है. इस तरह के जघन्य कृत्य वाले खबर अक्सर समाचार में होते हैं. इसको देखते हुए सिविल सोसाइटी संगठन उड़ीसा श्रमजीबी मंच, महिला श्रमजीबी मंच, सोनभद्र विकास संगठन और आत्मशक्ति ट्रस्ट ने इस घटना की निंदा की है एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश पुलिस एवं बुलंदशहर के जिलाधिकारी को टैग करते हुए सैकड़ो ट्विट करते हुए सुदीक्षा और उनके परिवार को तत्काल न्याय देने की मांग की है.

सुश्री शांति भोई, अध्यक्ष, महिला श्रमजीवी मंच  ओडिशा ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ सभी प्रकार की हिंसा को रोकना होगा. सुदीक्षा की मौत एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला है और इससे पता चलता है कि हमारे समाज में महिलाओं की सुरक्षा कैसी है.  आत्मशक्ति ट्रस्ट की कार्यकारी ट्रस्टी रूचि कश्यप ने कहा की पुरुष प्रधान एवं पितृसत्तात्मक सोच को बदलने की जरुरत है तभी महिलाओं को उचित सम्मान एवं अधिकार मिल सकते हैं. महिलाओं के साथ बढ़ रही हिंसक घटनाये चिंता का विषय हैं इसको लेकर समाज एवं सरकार दोनों को पहल करने की ज़रूरत है.

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