सर्वोच्च न्यायालय ने ‘पद्मावत’ पर 3 राज्यों में लगा प्रतिबंध हटाया, करणी सेना ने कहा नहीं मानेंगे सुप्रीम कोर्ट को




सर्वोच्य न्यायालय

-द मॉर्निंग क्रॉनिकल हिंदी डेस्क

नई दिल्ली, 18 जनवरी, 2017 | सर्वोच्च न्यायालय ने फिल्म ‘पद्मावत’ की रिलीज पर रोक के गुजरात, राजस्थान और हरियाणा की सरकारों के आदेश पर गुरुवार को रोक लगा दी। अब फिल्म के पूरे देश में रिलीज होने का रास्ता साफ हो गया है। फिल्म जगत ने सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश की सराहना की है। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविल्कर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने तीन राज्यों द्वारा विवादास्पद फिल्म की रिलीज पर लगाई गई रोक की ‘अधिसूचनाओं और आदेशों’ पर रोक लगाते हुए कहा कि अन्य राज्य भी फिल्म की स्क्रीनिंग पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी नहीं करेंगे।

अपने पूर्व फैसले का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।

अदालत ने यह फैसला फिल्म के निर्माताओं भंसाली प्रोडक्शन्स और वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स की याचिका पर सुनाया। निर्माताओं ने गुजरात, राजस्थान और हरियाणा सरकार द्वारा फिल्म की रिलीज पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती दी थी।

इस फिल्म का विरोध करने वाले राजपूत संगठन श्री राजपूत करणी सेना ने अपनी अगली रणनीति तैयार कर ली है।

संगठन के एक नेता ने आईएएनएस को बताया कि उन लोगों ने देशभर के सिनेमाघरों के मालिकों से कहा है कि वह फिल्म को ना दिखाएं। अगर वह फिल्म प्रदर्शित करेंगे तो फिर वे इसका ‘खामियाजा’ भुगतने के लिए तैयार रहें।

NDTV में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, करणी सेना के युवकों ने पोस्टर फाड़ कर प्रदर्शन किया। बिहार में मुज़फ़्फ़रपुर के ज्योति सिनेमा हॉल के पास करणी सेना के सदस्य फिल्म नहीं चलने देने के नारे लगा रहे थे। लाठी और तलवार से लैस करणी सेना के सदस्यों ने पोस्टर फाड़कर अपना विरोध प्रदर्शन किया। इन युवकों ने बिहार सरकार से मांग की है कि फ़िल्म को प्रदर्शित नहीं किया जाय नहीं तो हमलोग किसी भी हद तक जाकर विरोध करेंगे।

करणी सेना के नेता लोकेंद्र सिंह ने देशभर के सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वो सुनिश्चित करें कि फिल्‍म सिनेमाघरों में प्रदर्शित न हो।

फिल्म बिरादरी के सदस्य श्याम बेनेगल, मनीष मुंद्रा, मधुर भंडारकर और अशोक पंडित भी उन लोगों में शामिल है जिन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की सराहना की है।

बेनेगल ने आईएएनएस से कहा, “साफ है, यह अभिव्यक्ति की आजादी की जीत है।”

अशोक पंडित ने आईएएनएस से कहा, “इस फैसले ने राजनीतिक दलों के अहंकार को तोड़ दिया है जिन्होंने यह सोच कर इस फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया था कि वे ऐसा कर सकते हैं। यह फिल्म उद्योग की बड़ी जीत है।”

निर्माता मुंद्रा ने ट्वीट किया, “सीबीएफसी के प्रमाणीकरण के बाद भी फिल्म ‘पद्मावत’ पर प्रतिबंध लगाना राज्यों का कायरतपूर्ण कृत्य था। क्या वे वोट बैंक की राजनीति करने की कोशिश कर रहे थे या कानून और व्यवस्था के प्रबंधन की अपनी जिम्मेदारियों से दूर भाग रहे थे।”

अभिनेता आयुष्मान खुराना ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “दिन की सबसी अच्छी खबर। इस फैसले से लोकतंत्र में हमारे विश्वास की बहाली हुई हैं।”

साहित्यकार चेतन भगत ने कहा, “यह एक बेहतरीन फैसला है। हर कहानी को उस तरह से नहीं कहा जा सकता जिस तरह से दबंग लोग चाहते हैं।”

फिल्मकार रोहित शेट्टी ने उम्मीद जताई कि फिल्म शानदार तरीके से रिलीज होगी।

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