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कर्नल की डायरी: उस दिन तो हो गया कमाल (पन्ना 8)

मुझे देखते ही उसने ‘जय हिन्द’ के साथ अभिवादन किया था. हालांकि वह शारीरिक तौर पर कमज़ोर ज़रूर था, लेकिन उसके चेहरे से ख़ुशी टपक रही थी. मैंने उसकी ख़ुशी को लक्ष्य किया था और […]

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आखिर यह सब कैसे हुआ? : कर्नल की डायरी, पन्ना 7

वह एक निर्णायक रात थी. अंग्रेज़ों का डर और आतंक ख़त्म करने के लिए नेताजी ने एक योजना बनाया था. अब तक वह इस योजना का खाका बना चुके थे. इस खाके के अनुसार उन्होंने […]

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वो सत्रह लड़कियां…: कर्नल की डायरी – पन्ना 5

रंगून के दिनों की याद आज भी रोमांच से भर जाती है. आज़ाद हिन्द फ़ौज में भर्ती होने वालों का तांता लग गया था. हज़ारों युवक-युवतियों ने अपनी जिंदगी आज़ाद हिन्द फ़ौज को सौंप देने […]

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मोरैंग विजय के बाद: कर्नल की डायरी – पन्ना 4

‘आज़ाद हिन्द फ़ौज’ के जवानों के हौसले और कामयाबी को देखकर नेताजी ने रेजिमेंट के जवानों को संबोधित करते हुए कहा था – “बहादुरों, यदि तुम इसी तरह डटे रहे तो वह दिन दूर नहीं […]

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आज़ाद हिन्द फ़ौज के कर्नल महबूब की डायरी – पन्ना 1

कर्नल महबूब अहमद का जन्म 1920 में पटना में हुआ था. उनके पिता डॉक्टर थे, उनकी प्रारंभिक पढाई देहरा दून में हुई। सैन्य शिक्षा राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री देहरादून और इंडियन मिलिट्री अकादमी में हुई. ऑल […]