विशेष

रहबर भी ये हमदम भी ये ग़म-ख़्वार हमारे, उस्ताद ये क़ौमों के हैं मे’मार हमारे

यह दो पंक्तियाँ किसी अज्ञात शायर ने कहा है लेकिन यह शिक्षक के बारे में कुछ कहने के लिए बेहतरीन शब्द हैं। शिक्षक हमारे पथप्रदर्शक, हमारे साथी, हमारे सीनों में छिपे गम को समझने वाले […]