द लल्लन टॉप डॉट कॉम की लोकप्रियता देख कर पता चलता है कि हम मसखरों को केवल राजनीति में ही नहीं न्यूज़ में भी खूब जगह देते हैं




द लल्लन टॉप डॉट कॉम, नाम ही किसी जोकर साईट जैसा लगता है, लेकिन है भी ऐसा. इसके सूत्रधार जाने माने खड़े होकर जोकरई करने वाले अपने चहेते वरुण ग्रोवर हैं. लल्लन टॉप नाम की यह वेबसाइट 2015 में अक्टूबर में रजिस्टर करवाई गयी थी यानि इसका सफ़र बहुत लम्बा नहीं है लेकिन इस वेबसाइट ने जो उछाल हासिल की है वह भारत के कई प्रमुख वेबसाइट से भी ज्यादा है. इसकी भारत में अलेक्सा रैंकिंग 931 है और विश्व में इसकी रैंकिंग 12,156 है जबकि thewire.in नाम से जिस साईट की शुरुआत 2014 में पत्रकारिता के तीन महारथियों सिद्धार्थ वरदराजन, द हिन्दू अखबार के संपादक, पत्रकारिता में रामनाथ गोयनका अवार्ड पाने वाले, सिद्धार्थ भाटिया, डी एन ए अखबार के संस्थापको में एक, एम. के. वेणु, द इकोनॉमिक्स टाइम्स, द फाइनेंसियल एक्सप्रेस और द हिन्दू में नेतृत्व की भूमिकाओं में रहे, ने किया वह भी रैंकिंग यानि गूगल से आने वाली कमाई के मामले में लल्लन टॉप के आगे फिसड्डी साबित हो रहे हैं. thewire.in की रैंकिंग भारत में 1,374 है जबकि विश्व में इसकी रैंकिंग 18,195 है. आइए देखते हैं कि लल्लन टॉप आखिर टॉप क्यों है.

कारण नंबर एक – इसकी बवाल फैलाने वाली तस्वीरें और यौन अपराध से संबंधित समाचार की बहुतायत

इस साईट के चमकने के कई कारण हैं लेकिन जो प्रमुख लगता है वह है इसमें मौजूद बवाल फैलाने वाली तस्वीरें और यौन अपराध से संबंधित समाचार की बहुतायत. लल्लन टॉप की टीम लगता है कि दुनिया में कहाँ कहाँ यौन अपराध हो रहा है इसकी खबर एकदम मैक्रो स्तर पर रखता है और इसको खूब चटकारे के साथ पेश करता है. तस्वीर तो ऐसी की अगर आपको फूहड़ता पसंद है तो आप इसे अपने डेस्कटॉप पर भी स्थायी तौर पर लगा लेंगे और फूहड़ता पसंद नहीं है तो तौबा तौबा, राम राम करके साईट की तरफ से तो निकल ही लेंगे.

इस तस्वीर को देखकर आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि फूहड़ता कितनी है

इस चित्र के नीचे लिखा हुआ टेक्स्ट आपको सरस सलील और यौन अपराध पर आधारित दूसरी पत्रिकाओं की याद न चाहते हुए भी दिला ही देगी.

चित्र के नीचे की पंक्ति लल्लन टॉप की पूरी सामग्री का ब्यौरा बताने के लिए पर्याप्त है

कारण नंबर दो – इसके हेडलाइन्स यानि इसकी सुर्खियाँ

इसके हेडलाइंस तो अजब-गजब हैं और बेहतर रैंकिंग के कई कारणों में यह भी है. इस बीजेपी नेता के बेटे से लड़की बिना रेप हुए वापस आ गई, सिर्फ इसलिए खुश है का यह हेडलाइन हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष के बेटे विकास बराला द्वारा एक लड़की का पीछा और उसका अपहरण करने की कोशिश को लेकर है.

इसी तरह से दूसरा एक और हेडलाइन देखिए. कांग्रेस का वो प्रधानमंत्री, जिसके इस्तीफा देते ही सोनिया गांधी ने चांप दिया – यह चांपना तो बिहार और उत्तर प्रदेश का भी शायद ही कोई अच्छी तरह जानता हो.

इसी तरह से मन में सिहरन फैलाने वाले हेडलाइन में यह लल्लन टॉप मास्टर है जैसे सो रही लड़की की जांघ पर हाथ रखा, फिर लड़की ने जो किया, वो करना बहुत ज़रूरी था.

इसी तरह से इस हेडलाइन क्रिकेट मैच के नाम पर झमाझम इल्लीगल काम चल्ला है फेसबुक-यूट्यूब पर को समझने के लिए थोड़ा दिमाग भी लगाना पड़ सकता है.

कारण नंबर तीन – समाचार की इसकी श्रेणियां

इसके समाचार का जो वर्गीकरण है वह भी एकदम लल्लन टॉप ही हैं. उदाहरण के लिए, झमाझम और इसका पंचलाइन लपक के पढ़ रहे हैं लोग-

इसी तरह इसकी दूसरी श्रेणी लल्लन ख़ास जिसका पंचलाइन सपेसल तेरी खातिर लाया है.

इसके पहले पन्ने यानि लल्लन टॉप का पंचलाइन तो और भी धांसू है. मम्मी कसम मारक मजा मिलेगा. अब किसकी मम्मी को इन्होंने शहीद करने का प्लान बनाया है वह तो लल्लन भाई जी जानें. हाँ, इस साईट पर आपको मज़ा न मिले तो भी अपनी मम्मी को शहीद होने से बचाने के लिए मज़ा मार ही लीजिए तो अच्छा है.

कारण नंबर चार – लिखने की देहाती शैली

इसकी लोकप्रियता का कारण इसकी देहाती शैली भी हो सकता है. इस साईट में न्यूज़ अपडेट करने वालों के नाम में आपको चचा, मामू, मौसा इत्यादि भी मिल जाएंगे. जैसे एक आशुतोष चचा हैं उनका स्टाइल एक दम लल्लन टॉप है, देखिए उनकी लल्लन टॉप शैली – वह एक लेख में लिखते हैं –

सराहा फेसबुक, ट्विटर पर गदर काटे है. बहुत बड़े बड़े सिलबिट्टी इसकी चरस सूंघ लिए हैं. लेकिन सराहा की दुनिया भी नॉर्मल दुनिया की तरह ही है. वहां उसी को भाव मिलता है जिसे कुछ लोग जानते हों. नहीं तो लोग एक मैसेज को तरस जाते हैं. वो मुंह फैलाए निहारा करते हैं कि कोई एक गाली ही लिखकर भेज दे.

मतलब पूरा लल्लन टॉप है यह साईट! यह तो आशुतोष चचा थे इसी तरह से चंचल शुभी और पंडित असगर भी हैं.

इस साईट को देखने के बाद ऐसा मालूम होता है कि हमारा समाज जोकर नेता ही नहीं बल्कि जोकर न्यूज़ साईट को भी बहुत पसंद करता है.

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