सज्जन कुमार की सज़ा पर ट्वीट अरुण जेटली को महंगा पड़ा, लोगों ने पूछा सोहराबुद्दीन एनकाउंटर और 2002 गुजरात दंगे का क्या




अरुण जेटली को सज्जन की सज़ा पर ट्वीट करने के बाद मिला ट्विटर यूजर का जवाब

भाजपा नेता अरुण जेटली ने आज जब सज्जन कुमार की सज़ा पर कांग्रेस की विरासत को कोसा तब वह खुद ही इसका शिकार बन गए. कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार को आज दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में 5 सिखों की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.



इस सज़ा के बाद भारत के वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने ट्वीट किया. ट्वीट में उनहोंने कहा कि “दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सज्जन कुमार की सज़ा न्याय की देरी से जीत है. कांग्रेस और गांधी परिवार की विरासत 1984 दंगों के गुनाहों की कीमत चुकाती रहेगी.”

इस पर जेटली के ट्वीट थ्रेड पर ही बहुत सारे लोगों ने उन्हें 2002 दंगों की याद दिला दी. इलियास मंसूरी नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि “2002 के मोदी और शाह के सज़ा की प्रतीक्षा में हैं. न्याय में देरी हुई है न्याय से इनकार नहीं किया गया.”

एक दुसरे ट्विटर यूजर विष्णुकांत शर्मा ने लिखा कि “उन गुनाहों को कौन भुगतेगा जो अभी की सरकार कर रही है.”

एक अन्य यूजर धर्मेन्द्र सपरा ने अपने ट्वीट में लिखा कि “और भाजपा आपको वित्त मंत्री बनाने के लिए भुगतेगी.”

एक अन्य यूजर ने लिखा कि “और श्रीमान मोदी और उनकी पार्टी को 2002 का लाभ मिलता रहेगा, है न?”

भावना जैन ने अपने ट्वीट में लिखा कि “दंगा हमेशा दंगा होता है चाहे वो 1984 का हो या 2002 गोधरा दंगा या फिर 2013 का मुज्जफरनगर दंगा लेकिन आप यदि 1984 के लिए सिर्फ न्याय न्याय चिल्लाते हो और बाकी दो पर मौन रहते हो तो आप एक जिम्मेदार नागरिक नही है गोधरा और मुज्जफरनगर दंगा के दंगाईयो के खिलाफ कब आंदोलन कर रहे हैं?”

एक अन्य यूजर ने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर पर जेटली से जवाब मांगते हुए लिखा कि “जेटली जी गोधरा काण्ड और सोहराब एनकाउंटर पर भी थोड़ी बात करिए.”

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