दबाव की राजनीति में मारे जा रहें उपेंद्र कुशवाहा




पटना : बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं जिसे लेकर इस बार एनडीए में कुशवाहा को महज दो सीटें ही मिलने की संभावना बताई जा रही है लेकिन कुशवाहा की पार्टी तीन या उससे ज्यादा सीटें चाहती है. अब इन्ही सीट शेयरिंग मतभेदों को लेकर जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ सिंह ने अपने बयान से साफ कर दिया है कि उपेंद्र कुशवाहा रहे या जाएं एनडीए पर फर्क नहीं पड़ेगा.

हालांकि कुशवाहा ने साफ़ तौर पर ये कह दिया है हमारी पार्टी का ग्राफ पिछली बार के मुकाबले बढ़ा है. ऐसे में सीटों की संख्या का एलान होते वक्त इसका ख्याल रखा जाना चाहिए. गुरुवार को भी आरएलएसपी के कार्यकारी अध्यक्ष नागमणि ने इस महागठबंधन का जिक्र किया था.

बिहार की राजनीति में इन दिनों विधानसभा इलेक्शन को लेकर सियासत का पारा चढ़ता जा रहा है। जिसमे जदयू और कुशवाहा की पार्टी पूरी शिद्दत से अपना रोल निभा रहे हैं। जहाँ एक तरफ कुशवाहा ने नीतीश पर लगातार हमला करके दबाव की राजनीति शुरू कर दी. वही नीतीश कुमार के नीचे शब्द को नीच बताकर कुशवाहा ने नीतीश को घेरना शुरू कर दिया. अब इस हमले से कुशवाहा को छोड़ बिहार का पूरा एनडीए हिल गया.



अब इन हालातों में सुशील मोदी से लेकर चिराग पासवान तक नीतीश के साथ खड़े हो गये. यानी एनडीए में कुशवाहा अलग थलग पड़ गये. अब हो सकता है कि शनिवार को पटना में होने वाली पार्टी की बैठक में उपेंद्र कुशवाहा एनडीए से अलग होने का औपचारिक एलान कर दें.

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