उत्तर प्रदेश: बरेली अस्पताल में COVID19 के बहाने नफ़रत का खेल




केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार ने COVID19 के प्रसार को लेकर जिस तरह से अपनी विफलता को छिपाने के लिए तबलीगी जमात का दुरूपयोग किया वह अब भी देखने को मिल रहा है. उत्तर प्रदेश के श्री राम मूर्ति स्मारक इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़, बरेली में एक अजीब मामला सामने आया है.

उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित श्री राम मूर्ति स्मारक इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ में मरीजों को COVID19 की स्क्रीनिंग से पहले एक पर्ची दी जाती है जिसमें कुछ प्रश्न हैं उनमें चौथे नंबर का प्रश्न एक विशेष वर्ग के विरुद्ध नफ़रत भरने के उद्देश्य से डाला हुआ प्रतीत हो रहा है.

मेडिकल इंस्टिट्यूट में COVID19 के संदिग्ध मरीजों से पूछा जा रहा है कि क्या वह एक महीने में तबलीगी जमात में कहीं गए हैं या किसी तबलीगी जमाती से संपर्क हुआ है.

इस इंस्टिट्यूट का परचा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह भरा हुआ पर्चा 15 जुलाई 2020 का ही है. यानी यह परचा अब तक लोगों से भरवाया जा रहा है और लोगों के दिमाग में तबलीगी जमात यानी एक विशेष वर्ग के खिलाफ नफ़रत भरा जा रहा है.

ज्ञात रहे कि कई महीने से पूरा देश लॉक डाउन में लागू है. पूरे देश में मस्जिदों में नमाज़ियों के लिए पाबंदी है. लोग घरों में अपनी नमाज़ पढ़ रहे हैं. ऐसे में प्रश्न यह है कि तबलीगी जमात कहाँ से निकलेगी.

क्या है तबलीगी जमात?

तबलीगी जमात मुसलमानों का अंतर्राष्ट्रीय समूह है जो पूरी दुनिया में मुस्लिमों में नमाज़ पढने की आदत डालने के लिए घूम घूम कर लोगों को प्रवचन करती है. उनका कहना है कि मुसलमान अगर नमाज़ पढने लगे तो उनके अंदर सामाजिक बुराइयां खत्म हो जाएगी. यह दुनिया की पहली संख्या में इतनी बड़ी होने के बावजूद अराजनैतिक संगठन है. यह छोटे छोटे समूह में पूरे विश्व में घुमते हैं और इनका ठिकाना मस्जिद होता है. अभी लॉक डाउन है इसलिए तबलीगी जमात न कहीं निकल रही है और न कहीं से आ रही है.

अचानक लॉक डाउन के कारण पूरी दुनिया में तबलीगी जमात के लोग अपनी अपनी जगह फंस गए थे. यह केवल भारत के दिल्ली में ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न शहरों में हुआ जहाँ लोग फंसे थे. इसका मूल कारण यह था कि नोटबंदी की ही तरह नरेंद्र मोदी ने घरबंदी का एलान अचानक किया था. लेकिन तबलीगी जमात के दिल्ली स्थित मरकज़ में फंसे लोगों को मीडिया में गलत तरह से पेश करके और मौलाना साद को इसका विलेन बना कर एक विशेष वर्ग के खिलाफ नफ़रत फैलाने की कोशिश की गई जिसमें अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी आगे आगे रही.

अचानक घरबंदी के कारण लाखों मजदूर भी अपने अपने काम की जगह फंसे थे और हमने देखा कि उन मजदूरों को घर पहुँचने में कितनी कठिनाई हुई. नोटबंदी से भी अधिक इस अचानक लॉकडाउन से लोगों की मृत्यु हुई.

लखनऊ के सामाजिक कार्यकर्त्ता धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के राज्य में यह कोई नया नहीं है. वह यही खेल खेल कर सत्ता में आए हैं और इसी खेल को अपना कर सत्ता में रहना चाहते हैं. लेकिन जनता जाग गयी है. यह जोड़ तोड़ कर सरकार बना सकते हैं लेकिन अब वोट लेकर इनके लिए सरकार बनाना कठिन है.

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