भाजपा के ट्रम्प कार्ड क्यों हैं मुस्लिम शासक?




टीपू सुल्तान और जनरल करियप्पा (दाएं)
नरेंद्र मोदी ने खुद अपने मुख्य मंत्री काल में गुजरात में लगभग 100 मंदिरों को तुड़वाया था। मोदी ने उन मंदिरों को शासनिक ज़रूरतों को समझ कर ही तुडवाने का आदेश दिया था। अगर नरेंद्र मोदी शासक के बजाए हिन्दू होते तो वह ऐसा कभी नहीं करते।

-समीर भारती

आरएसएस द्वारा चलाए जा रहे विद्यालयों के लड़कों से जब आप पूछेंगे तो वह यह बताएंगे कि महाराणा प्रताप ने अकबर को कई बात पराजीत किया और अकबर से लेकर औरंगज़ेब और शेरशाह सूरी से लेकर टीपू सुलतान सब ने हिन्दुओं पर अत्याचार किए, मंदिर तोड़े और धर्मांतरण करवाए। हालांकि इतिहास का सच यह है कि महाराणा प्रताप को अकबर ने कई बार शिकस्त दी और यह इसलिए नहीं कि महाराणा प्रताप हिन्दू थे और अकबर मुस्लमान थे। मुस्लिम शासक मात्र शासक थे और इसके अलावा वह कुछ नहीं थे। शायद ही कोई ऐसा मुस्लिम शासक होगा जिनकी सेना का बागडोर किसी हिन्दू के हाथ में न हो और शायद ही ऐसा कोई हिन्दू शासक होगा जिनकी सेना का बागडोर किसी मुसलमान के हाथ में न हो।



कुछ अँगरेज़ इतिहासकार जिसके बारे में यह कहा जाता है कि उनहोंने सिर्फ़ इतिहास इसलिए लिखा क्योंकि वह भारत में हिन्दू और मुसलमान को विभाजित कर इस देश पर ब्रिटिश शासन की राह बनाना चाहते थे। उदाहरण के लिए, दक्षिण भारत में विलियम लोगान की किताब “मालाबार मैन्युअल” और केट ब्रिटलबैंक लिखित “लाइफ ऑफ़ टीपू” का हवाला देकर आरएसएस टीपू के बारे में यह दुष्प्रचारित करने की कोशिश करते आए हैं कि टीपू हिन्दू विरोधी थे। हालांकि उनकी पूरी किताब में कहीं कोई पक्का दस्तावेज़ी प्रमाण नहीं मिलते।

कई इतिहासकारों का मानना है कि अंग्रेजों द्वारा लिखित इतिहास की मंशा यह रही कि वह भारत के दो संप्रदायों को लड़ाकर यहाँ लंबे समय तक शासन कर सकें। और वह इसमें कामयाब भी हुए। उन्होंने न केवल अपने साहित्य से इन दोनों समुदायों के बीच की खाई को गहरी बनाई बल्कि गाय के नाम पर भी अंग्रेजों ने इन दोनों समुदायों को लड़ाया हालांकि यह नफ़रत फैलाने की नीति ज्यादा दिनों तक नहीं चली और उन्हें देश छोड़ कर भागना पड़ा। आरएसएस और भाजपा की नीति भी अंग्रेजों जैसी ही है। आरएसएस ने उन्ही साहित्य का सहारा लिया जिन साहित्य का सहारा लेकर अंग्रेजों ने फूट डालो शासन करो की नीति अपनाई थी। आरएसएस ने अपना साहित्य और इतिहास दोनों गढ़ा भी जिसका प्रमाण भाजपा नेताओं के भाषणों में मिल जाता है।

नरेंद्र मोदी का करियप्पा के बारे में हाल ही में यह कहना कि कांग्रेस ने उन्हें बेईज्ज़त किया था ऐसे ही साहित्य और इतिहास का जीता जागता सबूत है, जबकि यह तथ्य सबको पता कि जनरल करियप्पा की हत्या की साज़िश में आरएसएस के लोगों का ही हाथ था। आरएसएस के लोगों ने ही सिख अफसरों को जनरल करियप्पा की हत्या करने के लिए उकसाया था। साज़िश कामयाब नहीं हुई हालांकि हत्या की भरपूर कोशिश की गयी। साज़िश में संलिप्त पाए गए छ्ह लोगों को फांसी की सज़ा हुई थी। यह तथ्य 2009 में अमेरिकी खुफ़िया विभाग द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में मौजूद है।

देश के प्रथम जनरल केएम करियप्पा और देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु (चित्र साभार: भारत सर्कार फ़ोटो प्रभाग)

उल्लेखनीय है कि भाजपा के लोग तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर ही नहीं बल्कि झूठे तथ्यों को पेश कर जनता को मूर्ख बनाते रहे हैं। दक्षिण के जाने माने भाजपा के नेता हेगड़े ने टीपू सुलतान को बलात्कारी कहा था जबकि भाजपा समर्थित भारत के राष्ट्रपति राम कोविंद ने टीपू सुलतान की प्रशंसा की थी और उन्हें अंग्रेजों से लड़ने वाला महान योद्धा कहा था। पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे कलाम ने भी टीपू सुलतान और उनके पिता हैदर अली के बनाए मिसाइल की तस्वीर नासा में देखने की बात अपनी पुस्तक “विंग्स ऑफ़ फायर” में की थी।



सामाजिक कायकर्ता और इतिहास के जानकार शैलेश पाण्डेय कहते हैं कि शासक वर्ग कभी भी किसी ज़माने में हिन्दू और मुसलमान नहीं रहे। उनकी नीतियाँ धर्म विशेष को फैलाने से संबंधित कभी नहीं रही, उनका एक मात्र उद्देश्य था कि शासन लंबे समय तक कैसे किया जाए। अगर ऐसा होता तो हिन्दू शासक हिन्दुओं से और मुस्लमान शासक मुस्लमान से कभी नहीं लड़ते। वह कहते हैं कि आज भी जो दुनिया में हो रहा है वह मुस्लिम, हिन्दू, सिख और इसाई का कोई खेल नहीं है बल्कि यह पूरा खेल है संसाधन पर ताक़तवर लोगों के क़ब्ज़ा करने का।

वह आगे कहते हैं कि अगर ऐसा होता तो नरेंद्र मोदी ने खुद अपने मुख्य मंत्री काल में गुजरात में लगभग 100 मंदिरों को नहीं तुड़वाया होता। वह कहते हैं कि मोदी ने उन मंदिरों को शासनिक ज़रूरतों को समझ कर ही तुडवाने का आदेश दिया था जबकि नरेंद्र मोदी स्वयं ही राम मंदिर मुहीम की पैदावार हैं। उनका कहना है कि जनता को चाहिए कि वह अपना भला बुरा समझें और अंग्रेजो की फूट डालो राज करो की नीति को चुनाव में बेहतर जवाब दें।

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