आयुर्वेद के चमत्कारी बाबा, आचार्य बालकृष्ण को क्यों लेनी पड़ी एम्स में शरण?




पतंजलि इस तरह के विज्ञापन से यह दावा करती रही कि उसके पास हर बीमारी की दवा है

-समीर भारती

उत्तराखंड में ज़मींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम (Zamindari Abolition and Land Reforms (ZALR) Act) और भारतीय स्टैम्प्स अधिनियम ( Indian Stamps Act) के तहत रामदेव और बालकृष्ण की कंपनी पतंजलि योग पीठ और इसकी अन्य कंपनियों के विरुद्ध 81 मामले दर्ज हैं. बालकृष्ण खुद फर्जी पासपोर्ट मामले में जेल जा चुके हैं और प्रवर्तन निदेशालय का भी इन पर केस है. यह अलग बात है कि नई सरकार के आते ही उनके सारे पाप ढक दिए गए हैं. खोजी पत्रकार प्रियंका पाठक नारायण की पुस्तक Godman to Tycoon जो भारत में अघोषित तौर पर प्रतिबंधित है में प्रियंका ने रामदेव और बालकृष्ण जोड़ी के काले कारनामों पर बहुत विस्तार से लिखा है.

पतंजली योगगुरु बाबा रामदेव योग और आयुर्वेद से पूरी दुनिया को स्वस्थ्य करने का दावा करते आ रहे हैं. आए दिन वह बीमारियों से बचने के लिए योग, गौमूत्र और अन्य आयुर्वेद की औषधियों का प्रचार खुद करते रहे हैं. देश में पहले से ही हिमालय, डाबर, बैधनाथ जैसी आयुर्वेद की कम्पनियाँ हैं लेकिन जिस तरह से रामदेव ने अपने सामानों को बेचने के लिए छद्म राष्ट्रवाद और धर्म का उपयोग किया है यह पहली बार हुआ है.

मामूली योग से अपना करियर शुरू करने वाले रामदेव ने अपनी सफलता के लिए धर्म और राजनीति दोनों का उपयोग किया. अन्ना आन्दोलन में पूरी तरह से सक्रीय रहे और कथित तौर इसे प्रायोजित करने वालों में एक रहे रामदेव को नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने से अप्रत्याशित तौर पर लाभ मिला. न कंपनी के टर्नओवर में भारी उछाल देखा गया बल्कि कई राज्यों में उन्हें लगभग मुफ्त जमीने भी उपलब्ध कराई गईं. उत्तराखंड में केवल उनके ऊपर ज़मीन गबन को लेकर 81 केसेज़ दर्ज हैं जिनका अब तक कुछ नहीं हुआ. 2013 में द हिन्दू में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड सरकार ने ज़मींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम (Zamindari Abolition and Land Reforms (ZALR) Act) और भारतीय स्टैम्प्स अधिनियम ( Indian Stamps Act) के तहत रामदेव और बालकृष्ण की कंपनी पतंजलि योग पीठ और इसकी अन्य कंपनियों के विरुद्ध 81 मामले दर्ज किया था.

रामदेव ने अपने सामान को देशभक्ति में पैक कर बेचने के लिए कई बार मुसलमानों पर आपत्तिजनक बयान भी दिया. रामदेव ने भारत स्वभिमान पार्टी भी बनाई और यह घोषणा भी की कि उनकी पार्टी हर संसदीय क्षेत्र से अपना उम्मीदवार खड़ी करेगी. ऐसा हुआ नहीं कि क्योंकि जानकारों के अनुसार जनता को बेवकूफ बनने का उनका यह तरीका था. वह असल में आरएसएस एजेंट के तौर पर कांग्रेस को अस्थिर करने के लिए अन्ना के साथ काम कर रहे थे.

ज्ञात रहे कि बालकृष्ण फर्जी पासपोर्ट मामले में 2012 में जेल जा चुके हैं. और उन पर हवाला से पैसा देश से बाहर भेजने का आरोप है. लेकिन भाजपा के सत्ता में आते ही सारे छद्म राष्ट्रवादी आज दूध के धुले नज़र आ रहे हैं लेकिन सत्य यह है कि अंदर बहुत अधिक कालिख है.

रामदेव और बालकृष्ण के आयुर्वेद और योग चमत्कार का ढोंग का पर्दाफाश तब पूरी तरह से हो गया जब खुद को आयुर्वेद के चमत्कार के रूप में प्रस्तुत करने वाले बालकृष्ण को आयुर्वेद पर ही भरोसा नहीं रहा और उन्हें सीधे जान बचाने के लिए अंग्रेजी या फिर कहें विदेशी पद्धति की शरण में आना ही पड़ा.

जानकार का कहना है कि बालकृष्ण का पतंजली आयुर्वेद लिमिटेड पर 95 प्रतिशत से अधिक का मालिकाना हक है और वह अरबपति हैं ऐसे में उनके जान की कीमत बहुत ज्यादा है और वह राजीव दीक्षित की तरह अपनी जान की बाज़ी लोक लज्जा में नहीं लगा सकते थे. ज्ञात रहे कि राजीव दीक्षित की मौत भी आयुर्वेद के भरोसे रहने पर हो गयी थी. लोगों का कहना है कि राजीव दीक्षित आयुर्वेद को लेकर बहुत अधिक आदर्शवादी थे लेकिन आयुर्वेद इतना सक्षम नहीं है कि वह आपातकाल में किसी की जान बचा सके. अफवाह यह भी है कि राजीव दीक्षित की लोकप्रियता रामदेव से कहीं अधिक बढ़ रही थी इस कारण उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी.

बालकृष्ण एम्स से स्वस्थ्य होकर अपने हरिद्वार आश्रम में लौट चुके हैं और रामदेव के अनुसार उन्हें प्रसाद में ज़हर देने की कोशिश की गयी. उन्हें चक्कर और सीने में दर्द की शिकायत को लेकर पहले हरिद्वार के एक अस्पताल में लाया गया था जहाँ से उन्हें ऋषिकेश एम्स में रेफेर कर दिया गया था.

पत्रकार प्रियंका पाठक नारायण की पुस्तक Godman to Tycoon में प्रियंका ने रामदेव और बालकृष्ण जोड़ी के काले कारनामों पर बहुत विस्तार से लिखा है. इस पुस्तक से रामदेव को इतना डर लगा कि उनहोंने दिल्ली हाई कोर्ट से इसे बंद करने की अर्जी लगा दी. रामदेव का प्रभाव इतना है कि यह पुस्तक आपको अब इंडियन स्टोर पर नहीं मिलेगी.

अगर यह उपलब्ध हो तो इसे पढ़े. पढ़ कर मालूम होगा कि किस तरह बाबा बने रामदेव और बालकृष्ण ने भारतीय जन मानस को मूर्ख बनाकर अरबों का कारोबर स्वदेशी के नाम पर खड़ा किया.

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