क्यों हो रही है ‘शत्रु’ को कांग्रेस में परेशानी?




शत्रुघ्न सिन्हा अपने संसदीय क्षेत्र पटना साहिब में

भाजपा को छोड़ कर आए शत्रुघ्न सिन्हा ने अब तक पटना साहिब लोक सभा से अपनी उम्मीदवारी का नामांकन पर्चा दाखिल नहीं किया है. मीडिया सूत्रों के अनुसार उन्हें अब तक पार्टी चिन्ह नहीं मिला है. पार्टी चिन्ह के न मिलने के कारण उनके नामांकन में देरी हो रही है.

भाजपा में मोदी नेतृत्व से परेशान थे बिहारी बाबू

वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के नजदीकी माने जाने वाले शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा में मोदी शासन में अलग थलग नज़र आ रहे थे. राज्य सभा से सांसद सिन्हा वाजपेयी कैबिनेट में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के अलावा जहाज़रानी मंत्री भी बनाए गए थे. 2004 में वह पहली बार भाजपा के टिकट पर राजद के विजय कुमार को हराकर पटना साहिब से सांसद बने. तब कांग्रेस के उम्मीदवार शेखर सुमन तीसरे पायदान पर रहे थे. 2014 में मोदी के नेतृत्व में वह फिर से पटना साहिब से सांसद चुने गए. इस बार उनहोंने कांग्रेस के कुणाल सिंह को हराया था. लेकिन इस बार उन्हें कोई मंत्रालय नहीं दिया गया और उन्हें अलग थलग रखा गया.

भाजपा के सांसद रहते हुए सिन्हा मोदी नेतृत्व पर प्रश्न करते रहे और उनकी आलोचना को पार्टी में बगावत की तरह देखा जाने लगा. पार्टी हाई कमान की नाराजगी के कारण उन्हें पटना साहिब से इस बार टिकट नहीं दिया गया. उनकी जगह इस बार मोदी कैबिनेट में रहे कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद को उम्मीदवार बनाया गया.

वर्तमान लोगों और नीतियों के कारण मैंने भाजपा छोड़ा, मेरे पास कोई विकल्प नहीं बचा था: कांग्रेस में शामिल होने के बाद शत्रुघ्न सिन्हा

इसके बाद उनहोंने भाजपा छोड़ कर कांग्रेस ज्वाइन कर लिया. भाजपा छोड़ने पर उनहोंने कहा था: “मैं भारी मन और अपार पीड़ा के साथ आखिरकार अपनी पुरानी पार्टी से 6 अप्रैल को विदा हो रहा हूं जो कि इसका संस्थापना दिवस है, कारण हम सबको अच्छी तरह पता है। मुझे अपने लोगों से कोई शिकायत नहीं है क्योंकि वे मेरे परिवार की तरह थे. मैं भारत रत्न नानाजी देशमुख, दिवंगत और महान पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और निश्चित रूप से, हमारे मित्र, दार्शनिक, उत्कृष्ठ नेता और मार्गदर्शक लाल कृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गजों के मार्गदर्शन और आशीर्वाद के साथ इस पार्टी में तैयार हुआ था।”

मोदी और अमित शाह पर उनहोंने निशाना साधते हुए उनहोंने कहा था ““मैं उन लोगों में से कुछ को शामिल करना चाहूंगा जो उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे, जो अन्याय और लोक शाही को ताना शाही में बदलने के लिए जिम्मेदार हैं। मैं क्षमा करता हूं और समय के इस पड़ाव पर उन्हें भूल जाना चाहता हूं। पार्टी के कुछ मौजूदा लोगों और नीतियों के साथ मेरे मतभेद रहे, उसके बाद मेरे पास कोई विकल्प नहीं था,  सिवाय इसके कि मैं इनसे जुदा हो जाऊं.”

कांग्रेस में शामिल होने पर बताया था इसे गाँधी और पटेल की पार्टी

भाजपा छोड़ने के बाद उनहोंने कांग्रेस ज्वाइन किया. कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद उनहोंने इसे गाँधी और पटेल की पार्टी बताया था और राहुल गांधी को सक्षम और डायनामिक नेता बताया था और लालू और राजद की भी तारीफ़ की थी. उनहोंने अपने ट्वीट में कहा था: “मुझे आशा है कि इस बेहद पुरानी राष्ट्रीय पार्टी, जिसमें मैं कदम रख रहा हूं, मुझे एकता, समृद्धि, प्रगति, विकास और महिमा के लिहाज से अपने लोगों, समाज और राष्ट्र की सेवा करने का अवसर प्रदान करेगी। यह महात्मा गांधी, नेहरू, पटेल और कई अन्य महान राष्ट्र निर्माताओं की पार्टी है। आज के और भविष्य के भारत के बहुत ही डायनामिक, सक्षम, आजमाए हुए, और सफल चेहरा, कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष राहुल गाँधी के नेतृत्व में, मैं आशा करता हूं, मेरी इच्छा है और मेरी प्रार्थना है कि मैं एक बेहतर दिशा में आगे बढूंगा। लोकतंत्र ज़िंदाबाद…. कांग्रेस पार्टी का लालू और तेजस्वी के राजद के साथ गठबंधन ज़िंदाबाद। हमारा महान भारत ज़िंदाबाद। जय हिन्द।“

कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने किया था टिकट वापसी की मांग

शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी लखनऊ से राजनाथ सिंह के खिलाफ समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रही हैं. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अकेले ही चुनाव लड़ रही है. शत्रुघ्न सिन्हा द्वारा लखनऊ में अपनी पत्नी के लिए वोट मांगे जाने पर कांग्रेस में थोड़ी नाराजगी देखने को मिली थी. लखनऊ सीट से कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार प्रमोद कृष्णम को खड़ा किया है.

भाजपा से आए कांग्रेस में शत्रुघ्न सिन्हा से कुछ स्थानीय कार्यकर्ता के नाराज़ होने की भी खबर आई थी.

ऐसे कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, सिंबल मिलने के बाद वह 29 अप्रैल को नामांकन का पर्चा दाखिल कर सकते हैं.

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