रंजन गोगोई अपनी ही नसीहत क्यों भूल गए?




प्रधान मंत्री मोदी के साथ दोस्ताना माहौल में रंजन गोगोई (चित्र साभार: सोशल मीडिया)

पूर्व चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए जब भारत के राष्ट्रपति ने नामित किया तब कईयों की भौहें चढ़ गईं. उनके रिटायरमेंट के आस पास लिए जाने वाले निर्णयों पर जो बातें दब दब कर हो रही थीं वह अब मुखर हो गईं. चाहे ख़ास हो या आम उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाने लगे. लोग यह कहने लगे कि आखिर रंजन गोगोई खुद अपनी ही नसीहत पर अमल क्यों नहीं कर पाए.

सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने पूर्व चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई की वह बात याद दिलाई जब उनहोंने कहा था कि रिटायरमेंट के बाद सरकारी नियुक्तियां न्यायपालिका की आज़ादी पर धब्बा है.

येचुरी ने कहा कि “श्री रंजन गोगोई ने खुद ही पिछले साल कहा था कि लोगों का यह मज़बूत मत है कि रिटायरमेंट के बाद की नियुक्तियां न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर धब्बा है.”

गोगोई ने अपने कार्यकाल में कई बार न्यायपालिका के लिए पारदर्शिता और साख पर ज़ोर दिया था. पिछले साल, जब उनके ही अदालत की एक महिला कर्मचारी ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था तब उनहोंने बड़े प्रबल अंदाज़ में कहा था कि किसी न्यायाधीश की साख ही उसके लिए सब कुछ होता है. उनहोंने अपनी ईमानदाराना आचरण को बड़े पुरज़ोर ढंग से पेश करते हुए कहा था कि उनकी जो न्यायाधीश रहते हुए बचत है इसी से उनकी ईमानदारी का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. उनका कहना था कि उनके चपरासी ने उनसे अधिक कमाया है।

लेकिन इन सबका असर तब ख़त्म हो गया जब उन्हें राज्य सभा के लिए मनोनीत किया गया.

गोगोई के राज्य सभा के लिए मनोनीत होने के बाद उनके कई फैसलों को संदेह के घेरे में लाया जा रहा है. तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि उन्हें इस ख़बर से हैरानी नहीं हुई है. वह कहती हैं कि उनहोंने एनआरसी को हरी झंडी दी, राम मंदिर पर निर्णय दिया, जम्मू कश्मीर लॉक डाउन से संबंधित अर्ज़ी को सुनने से इंकार कर दिया और खुद पर यौन उत्पीड़न के मामले में खुद को क़ानून से ऊपर कर खुद को बचा लिया.

इस पर स्वराज्य इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने भी अपनी टिप्पणी भाजपा के दिवंगत पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के हवाले से किया है. उनहोंने भी इस हवाले से अप्रत्यक्ष तौर पर उनके निर्णयों को कटघरे में खड़ा किया है. उनहोंने कहा कि जेटली ने कहा था रिटायरमेंट से पहले के फैसले रिटायरमेंट के बाद की नौकरी की चाहत से प्रभावित होते हैं.

हालाँकि भाजपा के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा कहते हैं कि गोगोई इस प्रस्ताव को ठुकरा देंगे. गोगोई के पास इस प्रस्ताव को स्वीकार करने या ठुकराने के लिए अभी छह महीने का समय है.

सिन्हा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पूर्व चीफ जस्टिस को सद्बुद्धि आएगी और वह राज्य सभा की पेशकश को न कहेंगे. अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह न्यायपालिका की साख को बहुत नुकसान पहुंचाएंगे.

लेकिन ऐसा लगता नहीं है क्योंकि गोगोई ने गुवाहाटी में पत्रकारों से अपने आवास पर बातचीत में कहा कि वह बुधवार को दिल्ली जाएंगे और शपथ लेने के बाद मीडिया को विस्तार से बताएँगे कि वह राज्यसभा जा जा रहे हैं.

मतलब साफ़ है कि वह खुद की ही नसीहत नहीं मानेंगे और राज्य सभा की कुर्सी का मज़ा लेंगे.

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