विधवा को राशन कार्ड के बदले बनाया हवास का शिकार, सबको हुआ एड्स, काव्यात्मक न्याय (पोएटिक जस्टिस) का बेमिसाल नमूना




प्रतीकात्मक छवि

लखनऊ (उत्तर प्रदेश), 31 जनवरी, 2018 जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िला के भटहट ब्लॉक की 28 वर्षीय महिला की छह साल पहले शादी हुई थी। शादी के तीन साल बाद ही पति की बीमारी के कारण मौत हो गई। मायके वालों से भी महिला को सहारा नहीं मिला। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गुजर-बसर करने के लिए गरीब महिला ने राशन कार्ड खातिर रोजगार सेवक से मिली तो उसने ग्राम प्रधान से मिलवाया।  बेबस और अकेली महिला पाकर ग्राम प्रधान ने बुरी नजर गड़ा दी। फिर सेक्रेटरी सहित कुल 13 लोगों ने राशऩ कार्ड और विधवा पेंशन दिलाने का झांसा देकर महिला का शारीरिक शोषण किया।



यह मामला तब सामने आया जब तीन महीने पहले वह महिला बीमार हुई और उसे ग्राम प्रधान ने एक चिकित्सक के पास भेजा। चिकित्सक की सलाह पर जब महिला की खून की जांच हुई तो पता चला कि वह एचआईवी संक्रमित है। फिर दोबारा बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ब्लड टेस्ट हुआ तो वहां भी एचआईवी पॉजिटिव रिपोर्ट आई। यह पता चलते ही महिला का शारीरिक शोषण करने वालों में हड़कंप मच गया। चिकित्सकों की सलाह पर रोजगार सेवक, ग्राम प्रधान सहित 13 लोगों ने मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर पर जांच कराई तो पता चला कि सभी एचआईवी पॉजिटिव हैं। दैनिक हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक महिला के एचआईवी संक्रमित होने के बाद जब एआरटी सेंटर के कर्मियों ने उसकी काउंसिलिंग की तो महिला ने पूरी कहानी सुनाई कि किस तरह राशन कार्ड और विधवा पेंशन का झांसा देकर 13 लोगों ने अस्मत लूटी। महिला के पति की शादी के तीन साल बाद ही बीमारी से मौत हो गई थी। पति मुंबई में किसी फैक्ट्री में काम करता था। ऐसा माना जा रहा है कि पति से ही महिला को एचआईवी संक्रमण हुआ होगा।

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