सृजन घोटाला मामले में नीतीश कुमार और सुशील मोदी पर मुक़दमा हो: लालू प्रसाद यादव




मनोरमा देवी अपनी बहु प्रिया सिन्हा के साथ

पटना: राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भागलपुर सृजन घोटाले की सी बी आई जांच कराने की मांग की है. उनहोंने प्रेस से बात करते हुए कहा कि जिस तरह से 120-बी के तहत चारा घोटाला मामले में उन पर केस दर्ज कराया गया था उसी आधार पर घोटाला के समय के मुख्य मंत्री और वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी पर भी मुक़दमा होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अभी तक इस घोटाले का बहुत छोटा सा ही अंश लोगों के सामने आया है जब सी बी आई की जांच होगी तो मामला हज़ारों करोड़ तक पहुंचेगा. उन्होंने कहा कि यह घोटाला मात्र मुख्य मंत्री नीतीश कुमार और वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी की गलती का परिणाम है. इसमें नीतीश कुमार के कई चहेते अधिकारी संलिप्त हैं.


लालू यादव ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक चित्र साझा किया है जिसमें लिखा है कि घोटाला की सूत्रपात मनोरमा देवी के मुख्य मंत्री, वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी, गिरी राज सिंह और मनोज तिवारी से ले कर शाहनवाज़ हुसैन तक से अच्छे संबंध रहे हैं. उनहोंने कहा कि बिहार में हज़ारों करोड़ के घोटाले की लीपापोती की कोशिश हो रही है.

गिरिराज सिंह, शाहनवाज़ हुसैन  व अन्य मनोरमा देवी के साथ सृजन के कार्यक्रम में

उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि बिहार में हज़ारों करोड़ के घोटाले की लीपापोती करने की कोशिश हो रही है यही कारण है कि नीतीश ने अपने चहेते अफसरो को ही मामले की जांच सौंपी है।


क्या है सृजन घोटाला?

सृजन घोटाले का संबंध भागलपुर से लगभग 10 किलोमीटर दूर सबौर में स्थित सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड से है जिसकी संस्थापिका मनोरमा देवी ने इसकी शुरुआत 10 महिलाओं के सहयोग से किया था. बाद में 10 महिलाओं से यह सहकारिता बैंक में परिवर्तित हुआ जिसकी की पूँजी आज 8 करोड़ रुपए है.

यह पूरा घोटाला सरकारी फण्ड का सृजन द्वारा गलत तरीके से हथियाने का है। जांच अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार “जैसे ही ज़िला अधिकारी नज़ारत से संबंधित बैंक में राशि ट्रांसफर करने के लिए चेक जारी करते थे उस चेक के पीछे डी एम कार्यालय के कर्मचारी उनके फ़र्जी हस्ताक्षर करके और निर्देश लिख कर वह राशि एन जी ओ के खाता में डलवाने के लिए बैंक भेज देते थे और संबंधित बैंक अधिकारी उस पैसे को एन जी ओ के खाते में डाल देते थे. जब ज़िला अधिकारी सरकारी खर्चों के लिए कोई नया चेक जारी करते थे तो चेक के बराबर की राशि एनजीओ डी एम के खाता में डलवा देता था ताकि डी एम का चेक बाउंस न हो और किसी को पता न चले कि सरकारी पैसे का उपयोग कहीं और हो रहा है.

इस गोरख धंधे की शुरुआत कब से हुई है इसका अंदाज़ा लगाना अभी मुश्किल है लेकिन इसकी पहली शिकायत जुलाई 2013 में भागलपुर के रहने वाले संजीत कुमार ने तत्कालीन केन्द्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों से की थी. अतः इस शिकायत के वर्ष से यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है कि यह मामला उससे कहीं पहले से चल रहा है. इस शिकायत में शिकायतकर्ता ने सृजन महिला बैंक की कार्य प्रणाली पर विस्तृत जांच की मांग की थी. इस शिकायत में तात्कालिन ज़िला-अधिकारी रैंक की अधिकारी जयश्री ठाकुर जो उस समय भूमि-अधिग्रहण अधिकारी के तौर पर बांका ज़िला में कार्यरत थीं और अतिरिक्त कार्यभार के तौर पर भागलपुर भी संभाल रही थीं के खाते से सृजन महिला बैंक में 7.32 करोड़ रुपए जमा करवाने की बात कही गयी थी.


शिकायतकर्ता, संजीत ने इस शिकायत में आरबीआई के दिशानिर्देश का हवाला भी दिया था जो यह है कि चेक से किसी व्यक्ति द्वारा सहकारिता बैंक में अधिकतम राशि 50 हजार तक ही जमा कराई जा सकती है.

उस समय आरबीआई ने मामले की जांच को कोआपरेटिव कमिटी के रजिस्ट्रार को सौंपा था. आरबीआई के निर्देश पर सितम्बर 9, 2013 को उस समय के भागलपुर ज़िला अधिकारी ने इसकी जांच का काम वरिष्ठ सहायक ज़िला अधिकारी सुधीर कुमार और उस समय के ज़िला सहकारिता अधिकारी पंकज कुमार झा को सौंपा था. लेकिन उस जांच का क्या हुआ वह भी किसी को अभी तक पता नहीं है।

सृजन का नेटवर्क आज भागलपुर के 16 ब्लाक में फैला हुआ है. संगठन ग्रामीण इलाकों में स्व-रोजगार में प्रशिक्षण के कार्यक्रम भी आयोजित करती रही है. मनोरमा का इसी साल फरवरी में देहांत हो गया. अब इसका पूरा कार्य उनके बेटे अमित कुमार और बहु प्रिया सिन्हा चलाती थी जिनका नाम एफ.आई. आर. में आने के बाद दोनों ही फ़रार हैं.

सृजन से बिहार के कई बड़े नेताओं और प्रभावशाली अफसरों का गठजोड़ बताया जा रहा है जिनमें गिरिराज सिंह, शाहनवाज़ हुसैन और सुशील कुमार मोदी और मुख्य मंत्री नीतीश कुमार का नाम भी शामिल हैं. इनकी घनिष्टता का उल्लेख लालू प्रसाद ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में भी किया और अपने ट्विटर पोस्ट में इनके चित्र भी साझा किया है. हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि जो वीरेंद्र यादव लालू के क़रीब माने जाते हैं भागलपुर में उनके ज़िला अधिकारी रहते हुए सबसे अधिक पैसे की निकासी की गयी हैं.

द मॉर्निंग क्रॉनिकल डेस्क से अर्थशास्त्री और अल खैर कोआपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन अरशद अजमल ने कहा कि इसके लिए कौन कौन ज़िम्मेदार हैं यह तो जांच के बाद ही पता लगेगा लेकिन जिस तरह से रिपोर्टें आ रही हैं उससे साफ़ ज़ाहिर है कि सृजन में क्रेडिट सोसाइटी के नियमों की भरपूर अवहेलना की गयी है.

पिछले 4 दिनों से आर्थिक अनुसंधान इकाई के कई अधिकारी मामले की जांच पड़ताल कर रहे हैं और इस मामले में अब तक लगभग 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिनमें सेवानिवृत्त अनुमंडल अंकेक्षक सतीश चंद्र झा, सृजन महिला विकास सहयोग समिति की प्रबंधक सरिता झा, भागलपुर समाहरणालय का लिपिक और डीएम के स्टेनोग्राफर प्रेम कुमार, डीआरडीए के नाज़िर राकेश यादव, जिला भू-अर्जन कार्यालय के नाज़िर राकेश झा, इंडियन बैंक के क्लर्क अजय पांडेय और प्रिंटिंग प्रेस के मालिक वंशीधर झा शामिल हैं।

यक्ष प्रश्न यह है कि क्या सृजन खाते में ट्रांसफर किए गए पैसे वापस सरकारी खज़ाने में आएँगे? इस प्रश्न का जवाब बिहार सरकार की ओर से अब तक स्पष्ट नहीं किया गया है.

 

 

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