बिहार में जातीय पोस्टर की शुरू हुई सियासत




नई दिल्ली : जैसे जैसे लोकसभा चुनाव नज़दीक आती जा रही है वैसे वैसे बिहार में सियासत का पारा चढ़ता जा रहा है। ये बात हमेशा में मानने वाली रही है कि बिहार की राजनीति में जाति एक बड़ा फैक्टर रहा है। राजनीतिक पार्टियां जातिगत सम्मेलन करती रही हैं, लेकिन बिहार के राजनैतिक इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है।

कांग्रेस की नयी प्रदेश कार्यसमिति की ओर से जाति और समुदाय आधारित पोस्टर लगाये जाने के बाद बिहार में विवाद शुरू हो गया है। दरअसल पोस्टरों में नेताओं की लगायी गयी होर्डिंग में नेताओं की तस्वीर पर उनके नाम की जगह जाति या समुदाय बताया गया है।


कांग्रेस के सिद्धार्थ क्षत्रिय की ओर से लगायी गयी होर्डिंग में पार्टी की नयी प्रदेश कमेटी में शामिल नेताओं की जाति दिखायी गयी है। बैनर में सामाजिक समरसता की बात की गयी है।

कांग्रेस की ओर से जाति और समुदाय का पोस्टर का बचाव करते हुए कांग्रेस नेता कौकब कादरी ने मीडिया सूत्रों से कहा है कि जाति के आधार पर ही हमारी सामाजिक व्यवस्था है। जाति को नकारा नहीं जा सकता है। सरकारी नौकरी में भी जाति बतानी पड़ती है।

वहीँ आपको बताते चले कि हाल ही में भाजपा नेता नेता गिरिराज सिंह ने नाम के आगे अपना गोत्र लगाते हुए लोगों से गोत्र लगाने का आह्वान किया था।

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