फिर सामने आया भाजपा का दोहरा ‘चेहरा और चरित्र’




चारा घोटाला में सज़ायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्य मंत्री और कांग्रेसी नेता जगन्नाथ मिश्रा की नई पुस्तक के विमोचन में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी और बिहार के उप मुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशिल मोदी (फ़ोटो साभार: ट्विटर)

मनीष शांडिल्य

सोमवार 21 जनवरी को एलएन मिश्रा न्यू इंडिया चेंज मेकर अवार्ड समारोह का आयोजन बिहार की राजधानी पटना में हुआ. इस समारोह में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र की 22वीं पुस्तक “बिहार बढ़कर रहेगा” का लोकार्पण भी हुआ. इस कार्यक्रम में बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी बतौर अतिथि शामिल हुए. पुस्तक विमोचन के बाद उन्होंने जगन्नाथ मिश्र की तारीफ करते हुए ट्वीट किया और कार्यक्रम की तस्वीरें भी इस माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफार्म पर साझा कीं.



फिर क्या था, कार्यक्रम में सुशील मोदी का शामिल होना आलोचना के घेरे में आ गया क्योंकि सुशील मोदी और जगन्नाथ मिश्र के साथ एक दूसरी पहचान भी जुड़ी हुई है. सुशील मोदी जहां एक ओर बिहार के बहुचर्चित पशुपालन घोटाला के याचिकाकर्ता और इसके खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ते हुए इसे अंजाम तक पहुंचाने वालों में से जाने-गिने जाते हैं, वहीं जगन्नाथ मिश्र इस घोटाले के लिए दोषी करार दिए जा चुके हैं. ऐसे में सुशील मोदी द्वारा सार्वजनिक रूप से जगन्नाथ मिश्र की तारीफ करने से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारे में हलचल मचनी ही थी और ऐसा हुआ भी.

उनके ट्वीट का जवाब देते हुए अनूप यादव ने लिखा, “आपको इतना तो पता होगा कि जगन्नाथ मिश्रा चारा घोटाला के मुख्य आरोपी हैं. कितनी बुरी बात है सुशील जी यह चरित्र और चेहरा भाजपा का तो नहीं है कि वो भ्रष्टाचारियों का महिमामंडन करे.”

चारा घोटाले के एक दूसरे दोषी लालू प्रसाद यादव हैं. इस आधार पर सुशील मोदी लालू यादव और उनके परिवार पर हमला करने का कोई मौका नहीं चूकते हैं. ऐसे नेता सुशील मोदी का इस घोटाले के एक दूसरे दोषी जगन्नाथ मिश्र के किताब के विमोचन कार्यक्रम में अतिथि बनने से चाय की प्याली में तूफान आना ही था.

सुशील मोदी द्वारा जगन्नाथ मिश्र की तारीफ किए जाने के कुछ देर बाद लालू यादव ने छोटे बेटे और बिहार में विरोधी दल के नेता तेजस्वी यादव ने सुशील मोदी को निशाने पर लिया. उन्होंने ट्वीट किया, “पूर्व सीएम पंडित जगन्नाथ मिश्रा जी, कथित चारा घोटाले में सज़ायाफ्ता हैं. मेदांता में ईलाज के लिए ज़मानत पर हैं. घोटाले के याचिकाकर्ता सुशील मोदी सज़ायाफ्ता मिश्रा जी की पुस्तक “बिहार बढ़कर रहेगा” का विमोचन कर रहे हैं. बेटा (जगन्नाथ मिश्र के बेटे नीतीश मिश्र) बीजेपी के उपाध्यक्ष हैं. बाक़ी सब दलित-पिछड़े चोर हैं. है ना?”

एक तरफ के अपराध के दोषियों के साथ सुशील मोदी का अलग-अलग व्यवहार खुद उनके व्यक्तित्व को कटघरे में खड़ा करता है. वहीं ऐसे में इस मसले पर तेजस्वी का तीखा तेवर सही जान पड़ता है. जगन्नाथ मिश्रा सवर्ण समुदाय से आते हैं. ऐसे में माना यह भी जा रहा है चुनावों में सवर्ण मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए भी सुशील मोदी ने आलोचना का जोखिम उठाते हुए जगन्नाथ मिश्र की तारीफ की है.

वहीं माना जा रहा है कि तेजस्वी ने भी ट्वीट कर एक साथ कई निशाने साधे हैं. तेजस्वी ने अपने ट्वीट के आखिर में लिखा, “सब दलित-पिछड़े चोर हैं? है ना…” राजनीतिक हलकों में इस लाइन का यह मतलब निकाला जा रहा है कि ऐसा कहकर उन्होंने बहुजनों की गोलबंदी करने के साथ-साथ जातिवाद पर तंज़ भी कसा है. उन्होंने इशारे में कहा है कि एक जैसे अपराध के बाबजूद उच्च जाति का होना जगन्नाथ मिश्र को सम्मान दिलाता है वहीं पिछड़ी जाति के लालू यादव को इसके लिए अपमान झेलना पड़ता है.

खैर वजह चाहे जो भी हो, सोमवार के प्रकरण से फिर एक बार यह आरोप सही साबित होता दिखाई देता है कि भाजपा अपनी सुविधा के हिसाब से भ्रष्टाचार और इसके आरोपियों पर निशाना साधती है. भाजपा के बारे में कहा-माना जाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उसका अभियान व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने की जगह महज सत्ता पाने का जरिया है. इसलिए वह एक ही तरह के आरोपियों को कभी जी भर के गाली देती है तो कभी अचानक से गले लगा लेती है या इसके उलट भी करती है. जगन्नाथ मिश्र का उदाहरण कोई नया नहीं है. सुखराम, व्यापम घोटाला, मुकुल रॉय, येदुरप्पा, सृजन घोटाला जैसे कई उदाहरण भाजपा के इतिहास और वर्तमान में भरे पड़े हैं.

Liked it? Take a second to support द मॉर्निंग क्रॉनिकल हिंदी टीम on Patreon!