उमड़ते सौ करोड़ अभियान में उमड़ी भीड़




उमड़ते सौ करोड़ अभियान में कैंडल मार्च करती महिलाएं और पुरुष

-द मॉर्निंग क्रॉनिकल हिंदी डेस्क

पटना (बिहार), 16 दिसम्बर, 2017 आज दिनांक 16 दिसम्बर 2017 को महिला थाना, गाँधी मैदान, पटना में निर्भया (ज्योति सिंह) को कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि देते हुए बिहार में उमड़ते सौ करोड़ अभियान की शुरुआत हुई. अभियान की बिहार समन्वयक सुश्री रजनी ने कहा कि हम यह मांग रखते हैं कि बिहार में (1) प्रत्येक थाने में “सिविल स्पेस” का कानूनी प्रावधान किया जाये ताकि पीड़ित महिलाएं आवश्यकता पड़ने पर सिविल सोसाइटी संगठन/व्यक्ति का सहयोग ले सके तथा थाना और नागरिक समुदाय के बीच मित्रवत सम्बन्ध बन सके. (2) महिला थाना को बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाये. (3) प्रत्येक प्रखंड में एक स्वतंत्र महिला थाना की स्थापना की जाये.

सनद रहे उमड़ते सौ करोड़ एक विश्वस्तरीय अभियान है जो 2013 में शुरू हुआ. संयुक्त राष्ट्र के 2012 के आंकड़ों के अनुसार विश्व में 100 करोड़ महिलायें हिंसा की शिकार है या हिंसा के भय से जी रही हैं. यह सर्वव्यापी महामारी है. सवाल यह है कि सरकार, समाज, परिवार इसके बारे में चुप क्यों है ? उमड़ते सौ करोड़ अभियान इस चुप्पी को चुनौती देने के साथ जवाबदेही की ओर बढ़ रहा है. महिलाओं और लड़कियों पर बढ़ रही सभी प्रकार की हिंसा ये स्पष्ट सन्देश दे रही है कि महिलाओं की सुरक्षा में सभी असफल हैं – घरेलु हिंसा, साइबर अपराध, बाल यौन शोषण, एसिड हमला, बलात्कार व हत्या में व्यक्ति और संस्थाएं सभी लिप्त हैं. उमड़ते सौ करोड़ अभियान ने देशभर में विभिन्न अभियानों और समुदायों की मांगों को अपने साथ जोड़ा है… अन्याय के खिलाफ एकजुटता का मुद्दा, वर्ष 2018 में उमड़ते सौ करोड़ अभियान का केंद्र बिंदु है.

उमड़ते सौ करोड़ अभियान जो कि बिहार में इस वर्ष आज  दिनांक 16 दिसम्बर, 2017 को शुरू किया गया, के अंतर्गत पूरे बिहार के विभिन्न जिलों में 14 फ़रवरी, 2018 तक विभिन्न संस्थाओं द्वारा अनेक कार्यक्रम आयोजित होंगे. यह अभियान महिला हिंसा के मुद्दे के सवाल के साथ ट्रांसजेंडर समुदाय के सवाल, घरेलु कामगारों के सवाल, दलितों एवं अल्पसंख्यकों के मुद्दों को भी पूरे बिहार में उठाएगा.

मौके पर सुश्री रजनी (उमड़ते सौ करोड़ अभियान की राज्य समन्वयक एवं सहयोगी की संस्थापिका) एवं अरसिता (राष्ट्रीय घरेलू कामगार संगठन), रेशमा प्रसाद (दोस्ताना सफ़र), रणविजय कुमार, शम्श खान, प्रवीण मधु, (लोकतान्त्रिक जन पहल), कंचन बाला (महिला अत्याचार विरोधी संघर्ष मोर्चा), शाहदा बारी (एक्शनएड), अशोक कुमार (लॉ फॉर पीपुल), अनिल कुमार (बाल कल्याण समिति, वैशाली), नीना श्रीवास्तव (इक्विटी फाउंडेशन), संध्या (नारी गुंजन), विनय ओहदार (लैंडेसा),  उर्मिला, धर्मेन्द्र कुमार, निर्भय कुमार, प्रियंका देवी, रूबी देवी, लाजवंती देवी, ममता कुमारी, कृष्णा देव मिश्रा, स्मृति वर्मा, विश्वजीत भट्टाचार्या, सुनील झा, रोहन कुमार (छात्र नेता), वीरा यादव (ट्रांसजेंडर राइट्स एक्टिविस्ट), ने भाग लिया.

 

 

 

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