प्रेस समीक्षा

प्रेस समीक्षा: ‘डबल इंजन’ का ‘डबल दवाब’

-मनीष शांडिल्य बीते साल जब बिहार में एनडीए की सरकार बनी तो इसे सत्ता पक्ष की ओर से ‘डबल इंजन की सरकार’ बताया गया. माने कि पटना और दिल्ली में एक ही गठबंधन की सरकार […]

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बाल विवाह और दहेजः जागरुकता के साथ बाकी बड़ी जिम्मेदारियां भी पूरी करे सरकार

-मनीष शांडिल्य बिहार में 21 जनवरी को बनी मानव श्रृंखला ठीक एक सप्ताह बाद तब फिर चर्चा में आई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बिहार सरकार द्वारा राज्य में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ […]

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महान संस्थाएं दरक रही हैं, भटक रही हैं

-मनीष शांडिल्य शुक्रवार को दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने परंपराएं तोड़ते हुए आजाद भारत के इतिहास में पहली बार प्रेस-कांफ्रेस कर यह बताया कि उनके मुताबिक देश का लोकतंत्र खतरे में […]

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पुरखों की शहादत याद करने का भी दिन है पहली जनवरी

-मनीष शांडिल्य तथ्यात्मक रूप से महारों और पेशवा फौजों के बीच हुए इस युद्ध को विदेशी आक्रांता अंग्रेजों के खिलाफ भारतीय शासकों के युद्ध के तौर पर भी देखा जाता है. कुछ इस घटना को […]

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गुजरात के नतीजे साफ हैं कि लोकतंत्र संभल रहा है

-मनीष शांडिल्य कल इस वक्त तक बहुचर्चित गुजरात विधानसभा चुनावों के नतीजे संभवतः साफ हो जांएगे. लेकिन सीटों के आंकड़ों से इतर गुजरात चुनावों का एक नतीजा पहले से ही साफ है कि भारतीय लोकतंत्र […]

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राम जन्मभूमि विवाद पर क्या अमित शाह भागवत से भी सवाल पूछेंगे?

-मनीष शांडिल्य माना जाता है कि चुनावी राजनीति में भारतीय जनता पार्टी आज जिस बुलंदी पर खड़ी है उस मकाम तक उसे पहुंचाने में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की बहुत अहम भूमिका रही है. ऐसे […]